महासमुंद में कथित जातिगत प्रताड़ना मामले की निंदा, जाति उन्मूलन आंदोलन ने कार्रवाई की मांग की

महासमुंद जिले में एक बार कर्मचारी के साथ कथित जातिगत दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना की जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) ने निंदा की है। संगठन ने मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

Jun 23, 2026 - 16:02
 0  23
महासमुंद में कथित जातिगत प्रताड़ना मामले की निंदा, जाति उन्मूलन आंदोलन ने कार्रवाई की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l जिले में एक बार कर्मचारी के साथ कथित जातिगत दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना को लेकर जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) की छत्तीसगढ़ इकाई ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने घटना की निंदा करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

संगठन द्वारा जारी बयान के अनुसार, महासमुंद के समीप खैरा स्थित सपना बार में कार्यरत कर्मचारी विवेक कुर्रे के साथ कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणियां की गईं और मारपीट की गई। आरोप है कि बार बंद होने की सूचना दिए जाने के बाद कुछ लोगों ने कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। साथ ही धार्मिक एवं सामाजिक आस्था से जुड़े व्यक्तित्व के संबंध में भी आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।

जाति उन्मूलन आंदोलन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ गंभीर मामला है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संगठन का कहना है कि समाज में समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए तथा पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।

इस मामले को लेकर संगठन ने सामाजिक और लोकतांत्रिक संगठनों से भी सामाजिक समरसता और समानता के पक्ष में आवाज उठाने का आह्वान किया है। संगठन का मानना है कि संविधान में प्रदत्त समान अधिकारों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से लागू करना आवश्यक है।

घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का माहौल है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल संगठन ने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

जातिगत भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कानून स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध कराता है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। इसलिए मामले के सभी तथ्यों का परीक्षण होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

जाति उन्मूलन आंदोलन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संगठन ने सामाजिक सौहार्द, समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।