कुंवरगढ़ महोत्सव में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की मौजूदगी से बढ़ा उत्साह
कुंवरगढ़ महोत्सव में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ी लोक कला, संगीत और हास्य का शानदार प्रदर्शन हुआ। कार्यक्रम में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।
UINTED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक एक बार फिर ऐतिहासिक कुंवरगढ़ महोत्सव में देखने को मिली, जहां आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भव्य आयोजन में छत्तीसगढ़ी लोक कला, संगीत और हास्य का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर राज्य के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है और नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ पाती है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा की ऊर्जावान प्रस्तुति से हुई, जिसने दर्शकों में जोश भर दिया। इसके बाद लोक गायिका गरिमा दिवाकर ने भक्ति और लोक संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देकर माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया।
उभरती कलाकार चम्पा निषाद ने भी अपने मधुर गीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं, हास्य कलाकार पप्पू चंद्राकर ने अपने चुटीले अंदाज से कार्यक्रम में हंसी का रंग घोल दिया और दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार कलाकारों के विकास और प्रोत्साहन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस आयोजन में अनुज शर्मा (धरसीवां विधायक) और इंद्र कुमार साहू (अभनपुर विधायक) सहित कई जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इसके अलावा जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन समेत बड़ी संख्या में आमजन ने कार्यक्रम में भाग लिया।
कुंवरगढ़ महोत्सव जैसे आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच भी प्रदान करते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों से स्थानीय कलाकारों को पहचान मिलती है और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है।
कुल मिलाकर, यह सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, कला और संगीत का एक जीवंत उत्सव साबित हुई, जिसने सभी दर्शकों के दिलों में अपनी खास छाप छोड़ी।