नगर पंचायत कोतबा में तहसील स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन, आदिवासी संस्कृति और परंपरा की दिखी झलक

जशपुर जिले के नगर पंचायत कोतबा में तहसील स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। हाई स्कूल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक नृत्य ने पूरे नगर को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। इस दौरान विशाल रैली निकाली गई और आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, अधिकार, जल-जंगल-जमीन तथा सामाजिक एकता के संरक्षण का संदेश दिया गया।

Aug 10, 2026 - 12:04
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नगर पंचायत कोतबा में तहसील स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन, आदिवासी संस्कृति और परंपरा की दिखी झलक

UNITED NEWS OF ASIA. लक्ष्मी जांगड़े, जशपुर l नगर पंचायत कोतबा में तहसील स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। हाई स्कूल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रभर से हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और युवाओं ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की आकर्षक झलक प्रस्तुत की। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य ने पूरे कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से नगर के प्रमुख मार्गों से होकर विशाल रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ निकली रैली ने पूरे कोतबा नगर को आदिवासी संस्कृति, परंपरा और गौरव के रंग में रंग दिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के योगदान को याद किया। उन्होंने सामाजिक एकता, शिक्षा, विकास और आदिवासी अधिकारों के प्रति जागरूकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

महापुरुषों को नमन

कार्यक्रम की शुरुआत महान जननायकों के तैलचित्रों पर दीप प्रज्वलित कर उन्हें नमन करने के साथ हुई। भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर, वीर गेंद सिंह, महारानी दुर्गावती और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के योगदान को स्मरण किया गया। उपस्थित लोगों ने महापुरुषों के आदर्शों और संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए समाज की एकता और विकास के लिए आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति और विरासत का सम्मान, पहचान, आदर, अधिकारों की सुरक्षा और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से गहराई से जुड़ी है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

संस्कृति के साथ अधिकारों की बात

विश्व आदिवासी दिवस के माध्यम से समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और पारंपरिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, विकास और सामाजिक एकजुटता जैसे विषयों पर भी विचार रखे गए।

नगर पंचायत कोतबा अध्यक्ष हितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को आदिवासी समाज को समान नागरिक संहिता यानी UCC के प्रावधानों से बाहर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट परंपराएं और सामाजिक व्यवस्थाएं हैं और UCC को लेकर समाज में चिंताएं हैं। उन्होंने इसे आदिवासी समाज के लिए घातक साबित होने की आशंका जताई।

बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक पदाधिकारियों, अधिकारी-कर्मचारियों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी सहभागिता निभाई। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रम में पहुंचे। पूरे नगर में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा।

पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और युवाओं ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया। पारंपरिक नृत्य, गीत और संगीत की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। जगह-जगह आदिवासी संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाई दी।

कार्यक्रम के अंत में समाज के लोगों ने आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। साथ ही सामाजिक एकता को मजबूत करने, आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और समाज के अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।

कोतबा में आयोजित तहसील स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और अधिकारों की आवाज का बड़ा मंच बना। कार्यक्रम ने पूरे जशपुर क्षेत्र में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता का संदेश दिया।