कोरबा पाली वन विश्राम गृह तालाब की बदहाल स्थिति, लवर पॉइंट से शराबियों का अड्डा बना स्थल

कोरबा पाली स्थित वन विश्राम गृह का तालाब, जिस पर लाखों रुपये खर्च कर सौंदर्यीकरण किया गया था, अब बदहाली का शिकार है। दिन में यह लवर पॉइंट और शाम को शराबियों का अड्डा बन गया है, जिससे स्थानीय लोग नाराज हैं।

Jun 11, 2026 - 15:15
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कोरबा पाली वन विश्राम गृह तालाब की बदहाल स्थिति, लवर पॉइंट से शराबियों का अड्डा बना स्थल

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l वन विश्राम गृह के किनारे स्थित वन विभाग का तालाब, जिसे कुछ वर्ष पहले लाखों रुपये खर्च कर पर्यावरणीय सौंदर्य और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया था, आज उपेक्षा और लापरवाही की मिसाल बन गया है। कभी हरा-भरा और शांत वातावरण देने वाला यह स्थल अब अपनी मूल पहचान खो चुका है।

करीब 7 से 8 वर्ष पहले वन विभाग द्वारा इस तालाब का सौंदर्यीकरण कराया गया था। उस दौरान यहां सीढ़ियां, रेलिंग, पाथवे और बैठने की व्यवस्था तैयार की गई थी, ताकि स्थानीय लोग और पर्यटक यहां आकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें। लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी के चलते यह पूरा क्षेत्र धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया।

वर्तमान स्थिति में तालाब के चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। प्लास्टिक कचरा, कोल्ड ड्रिंक की बोतलें, चिप्स के पैकेट और अन्य अपशिष्ट सामग्री जगह-जगह बिखरी पड़ी है। कई स्थानों पर रेलिंग टूट चुकी है और सीढ़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पाथवे उखड़ने से आवागमन भी कठिन हो गया है। तालाब का पानी भी अब पहले की तुलना में गंदा नजर आने लगा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थल दिन और रात में अलग-अलग गतिविधियों का केंद्र बन गया है। दिन के समय यहां युवा प्रेमी जोड़े आते हैं और लंबे समय तक समय बिताते हैं, जिससे यह स्थान एक प्रकार से “लवर पॉइंट” के रूप में पहचाना जाने लगा है। वहीं शाम ढलते ही स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब यह स्थल शराबियों का अड्डा बन जाता है। यहां शराब की खाली बोतलें और अन्य आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है।

वन विश्राम गृह की बाउंड्री से सटा होने के बावजूद यहां किसी प्रकार की निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं है। वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद अनियमित गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है। न तो नियमित गश्त हो रही है और न ही किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है।

इस स्थिति के कारण परिवार और स्थानीय नागरिक अब यहां आना कम कर चुके हैं। पहले जो स्थान सुबह-शाम टहलने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए उपयुक्त माना जाता था, वह अब असुरक्षित और असहज माहौल के कारण उपेक्षित हो गया है।

स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर इस स्थल का सौंदर्यीकरण किया था, तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाई जानी चाहिए थी।

नागरिकों ने मांग की है कि तालाब की तत्काल सफाई कराई जाए, टूटी हुई संरचनाओं की मरम्मत हो, नियमित निगरानी के लिए कर्मचारियों की तैनाती की जाए और गंदगी फैलाने तथा नशाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही इस स्थल को पुनः एक सुरक्षित और परिवार-हितैषी पर्यावरणीय स्थल के रूप में विकसित किया जाए।