पाली हाईस्कूल में प्राचार्य पर व्याख्याता से मारपीट का आरोप, वृद्धा मां ने स्कूल गेट पर शुरू किया धरना
कोरबा जिले के पाली हाईस्कूल में प्राचार्य पर व्याख्याता से मारपीट का आरोप लगा है। पीड़ित की 65 वर्षीय मां ने प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर स्कूल गेट पर धरना शुरू कर दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा/पाली। जिले के पाली स्थित हाईस्कूल में एक गंभीर विवाद सामने आया है, जहां प्राचार्य पर अपने ही व्याख्याता के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं पीड़ित शिक्षक के परिवार में गहरा आक्रोश है। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पीड़ित की 65 वर्षीय मां स्कूल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गईं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाली हाईस्कूल में पदस्थ भौतिकी व्याख्याता प्रखर पांडेय और प्राचार्य मनोज सराफ के बीच पिछले कुछ महीनों से विभागीय विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि 27 अप्रैल को प्राचार्य ने प्रखर पांडेय को अपने कक्ष में बुलाया, जहां किसी विभागीय मुद्दे को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। यह विवाद अचानक बढ़कर मारपीट में बदल गया।
पीड़ित व्याख्याता का आरोप है कि प्राचार्य मनोज सराफ ने गुस्से में आकर उनके साथ मारपीट की और यहां तक कि हाथ में चप्पल लेकर उन्हें मारने के लिए दौड़ाया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्राचार्य ने उन्हें स्कूल परिसर से बाहर मुख्य सड़क तक दौड़ाया। किसी तरह अपनी जान बचाकर प्रखर पांडेय अपने घर पहुंचे, लेकिन इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई।
बताया गया कि व्याख्याता बीपी के मरीज हैं और लगातार दौड़ने के कारण उनकी हालत खराब हो गई। उनके नाक से खून बहने लगा और वे घर पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। परिजनों ने तत्काल उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां समय पर उपचार मिलने से उनकी हालत स्थिर हो सकी। घटना के बाद व्याख्याता ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
इधर, इस घटना से आहत होकर पीड़ित की 65 वर्षीय मां सकुंतला पांडेय स्कूल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गई हैं। उन्होंने हाथ में तख्ती लेकर “मनोज सराफ हटाओ, मेरे बेटे को बचाओ” जैसे नारे लगाए और प्राचार्य को तत्काल हटाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे रोजाना स्कूल समय में धरने पर बैठती रहेंगी।
सूत्रों के अनुसार, इस विवाद के पीछे प्राचार्य की कार्यप्रणाली और कथित मनमानी को वजह बताया जा रहा है। आरोप है कि पिछले चार वर्षों से विज्ञान विषयों के प्रायोगिक सामग्री से संबंधित रिकॉर्ड में अनियमितताएं हैं। भौतिकी स्टॉक रजिस्टर में कई प्रविष्टियां नहीं हैं, वहीं कुछ प्रोजेक्टर भी गायब बताए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि व्याख्याता पर फर्जी रिकॉर्ड दर्ज करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।
हालांकि, इन आरोपों की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह विवाद और अधिक बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों और शिक्षकों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके और स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो।