कोरबा की नन्ही कथक नृत्यांगना रियांशी श्रीवास ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता द्वितीय स्थान

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित "तारांगण 2026 – नृत्य महोत्सव" में कोरबा की 8 वर्षीय कथक नृत्यांगना रियांशी श्रीवास ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। डीएवी स्कूल की छात्रा रियांशी की इस उपलब्धि से कोरबा जिले का नाम राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित हुआ है।

Jun 9, 2026 - 11:43
Jun 9, 2026 - 11:45
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कोरबा की नन्ही कथक नृत्यांगना रियांशी श्रीवास ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता द्वितीय स्थान

UNITED NEWS OF ASIA. हितेश पाण्डेय, कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की नन्ही कथक नृत्यांगना रियांशी श्रीवास ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए द्वितीय स्थान हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 4 जून से 7 जून 2026 तक आयोजित Kathak Rockers All India National Dance, Music and Fine Art Competition and Festival "तारांगण 2026 – नृत्य महोत्सव" में देशभर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों से आए 300 से अधिक कलाकारों ने नृत्य, संगीत और ललित कला की प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच कोरबा की 8 वर्षीय कथक नृत्यांगना रियांशी श्रीवास ने अपनी आकर्षक और प्रभावशाली प्रस्तुति से निर्णायकों तथा दर्शकों का दिल जीत लिया। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्रदान किया गया। रियांशी वर्तमान में डीएवी स्कूल कोरबा की कक्षा चौथी की छात्रा हैं और कम उम्र में ही अपनी कला के माध्यम से विशेष पहचान बना चुकी हैं।

रियांशी की इस उपलब्धि के पीछे उनकी निरंतर मेहनत, समर्पण और कथक के प्रति गहरी रुचि का महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। वे नियमित रूप से कथक नृत्य का अभ्यास करती हैं और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला को निखार रही हैं।

यह पहली बार नहीं है जब रियांशी ने किसी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया हो। इससे पहले भी वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर चुकी हैं। गोवा, जयपुर, नागपुर, रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जैसे शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पुरस्कार और सम्मान हासिल किए हैं।

रियांशी वर्तमान में कथक नृत्य की शिक्षा गुरु प्रीति चंद्रा से प्राप्त कर रही हैं। प्रीति चंद्रा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से कथक में स्वर्ण पदक प्राप्त कलाकार हैं और वर्षों से कथक कला के संरक्षण एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके मार्गदर्शन में रियांशी लगातार अपनी प्रतिभा को निखार रही हैं।

रियांशी की इस सफलता पर उनके पिता गौतम श्रीवास, माता प्रतिभा श्रीवास, गुरु प्रीति चंद्रा तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने खुशी व्यक्त की है। सभी ने उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए भविष्य में और अधिक सफलता प्राप्त करने की शुभकामनाएं दी हैं।

कम उम्र में राष्ट्रीय मंच पर हासिल की गई यह उपलब्धि अन्य बच्चों और युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणादायक है। रियांशी श्रीवास ने यह साबित कर दिया है कि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर छोटी उम्र में भी बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं।