बाल मधुमेह की समय पर पहचान से बचाई जा सकती है बच्चों की जिंदगी, स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

रायगढ़ में जिला स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में 70 स्वास्थ्य कर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार और प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बच्चों में मधुमेह के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

Jun 9, 2026 - 11:36
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बाल मधुमेह की समय पर पहचान से बचाई जा सकती है बच्चों की जिंदगी, स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l बच्चों में तेजी से बढ़ रहे टाइप-1 डायबिटीज यानी बाल मधुमेह की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन को लेकर रायगढ़ में जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को इस गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था।

कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला में जिले के 70 स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों और लेडी हेल्थ विजिटर्स ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी, ताकि समुदाय स्तर पर प्रभावित बच्चों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में होने वाली एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसकी समय पर पहचान और उचित उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी गांव और समुदाय स्तर पर बीमारी के लक्षणों की पहचान कर प्रभावित बच्चों को शीघ्र स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार, रोग प्रबंधन, रोगी एवं परिजनों की काउंसलिंग, रोगी सहायता समूहों की भूमिका, सामुदायिक जागरूकता रणनीतियों तथा मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों ने समूह चर्चा और अनुभव साझा करने जैसी गतिविधियों के माध्यम से विषय की व्यावहारिक समझ भी विकसित की।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण अक्सर तेजी से विकसित होते हैं। इनमें बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, लगातार कमजोरी और थकान महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, घावों का देर से भरना तथा बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे संकेत शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

कार्यशाला में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को आवश्यक बताया। साथ ही बच्चों में स्वस्थ आदतों के विकास पर बल दिया गया।

यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रशिक्षण में सभी आमंत्रित स्वास्थ्य कर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैकरा, जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. कैनन डेनियल, डॉ. सुमित मंडल, डॉ. जावेद और सीमा बरेठ सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों का सहयोग रहा।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि समुदाय में जागरूकता फैलाकर बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।