किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन्स को रियल-टाइम और किसान-केंद्रित बनाने की मांग

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में ऑपरेशन ग्रीन्स योजना को अधिक प्रभावी बनाने, SAMPADA पोर्टल को e-NAM से रियल-टाइम जोड़ने और किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठाई, ताकि फल और सब्जी उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

Jul 24, 2026 - 11:18
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किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन्स को रियल-टाइम और किसान-केंद्रित बनाने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। लोकसभा में रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने देश के फल और सब्जी उत्पादक किसानों की आर्थिक सुरक्षा तथा उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से ऑपरेशन ग्रीन्स योजना तथा बाजार अंतःक्षेप योजना (MIS) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल किए और इन योजनाओं को अधिक व्यावहारिक एवं किसान-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

संसद में चर्चा के दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के कई आकांक्षी जिलों में टमाटर, फल और अन्य जल्दी खराब होने वाली फसलों के किसानों को बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। जब उत्पादन अधिक होता है तो कीमतों में भारी गिरावट आ जाती है, जिससे किसानों को मजबूरी में अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है। उन्होंने पूछा कि ऐसे समय में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) ने 50 प्रतिशत परिवहन और भंडारण सब्सिडी का कितना लाभ उठाया है और सरकार ने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में APMC के पुराने आंकड़ों पर निर्भरता के कारण मूल्य समर्थन तंत्र समय पर सक्रिय नहीं हो पाता। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने SAMPADA पोर्टल को e-NAM प्लेटफॉर्म के साथ रियल-टाइम एकीकृत करने का सुझाव दिया, ताकि बाजार में कीमतों की जानकारी तत्काल उपलब्ध हो सके और किसानों को समय रहते सहायता मिल सके।

बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी मांग की कि किसानों को प्रतिपूर्ति राशि का इंतजार करने के बजाय तुरंत अग्रिम वित्तीय सहायता या वाउचर उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए। उनका कहना था कि इससे किसानों को फसल बेचने के दौरान आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।

संसद में सरकार की ओर से जवाब देते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत बाजार अंतःक्षेप योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत जब किसी कृषि उत्पाद का बाजार मूल्य उत्पादन लागत से 10 प्रतिशत या उससे अधिक कम हो जाता है, तब केंद्र और राज्य सरकारें 50:50 के अनुपात में किसानों के नुकसान की भरपाई करती हैं तथा परिचालन व्यय भी साझा करती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि टमाटर, प्याज और आलू जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए ऑपरेशन ग्रीन्स योजना लागू है। इस योजना के तहत NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से अंतरराज्यीय परिवहन और भंडारण की व्यवस्था कर किसानों को राहत प्रदान की जाती है, जिससे बाजार में कीमतों को संतुलित रखने का प्रयास किया जाता है।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान मेहनत करके देश का पेट भरता है, लेकिन जब टमाटर, मिर्च, फल या अन्य बागवानी फसलों के दाम अचानक गिर जाते हैं तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि पीएम-आशा और बाजार अंतःक्षेप योजना का लाभ रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर सहित राज्य के सभी जिलों के किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से ऑपरेशन ग्रीन्स जैसी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे किसानों को समय पर सहायता मिलेगी, उनकी आय सुरक्षित होगी और कृषि क्षेत्र में स्थिरता आएगी। सांसद ने कहा कि किसानों की मेहनत का पूरा मूल्य दिलाना सरकार और नीति निर्माताओं की साझा जिम्मेदारी है तथा इसके लिए आधुनिक, पारदर्शी और रियल-टाइम व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।