बाल श्रम पर सख्त होगा शिकंजा, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास और दोषियों पर बहुस्तरीय कार्रवाई के निर्देश
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल श्रम के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए समीक्षा बैठक में रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बच्चे के पुनर्वास, आर्थिक सहायता, शिक्षा और कानूनी संरक्षण को अनिवार्य बनाने के निर्देश दिए। आयोग ने बाल श्रम कराने वालों पर बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई और सभी संबंधित विभागों के समन्वय से जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने पर जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल श्रम के खिलाफ अपनी कार्रवाई और अधिक सख्त करने का फैसला किया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब बाल श्रम के मामलों में केवल बच्चों को मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक बच्चे का समुचित पुनर्वास, शिक्षा, आर्थिक सहायता और दोषियों के खिलाफ बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी।
आयोग कार्यालय में आयोजित इस बैठक में श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम अधिकारी तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में विभागीय समन्वय को मजबूत बनाना था।
रेस्क्यू के बाद हर बच्चे को मिलेगा कानूनी संरक्षण
बैठक में आयोग ने निर्देश दिए कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए प्रत्येक बच्चे को अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इससे किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत बच्चों के संरक्षण, देखभाल और पुनर्वास की पूरी कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।
आयोग का मानना है कि केवल बच्चों को श्रम से मुक्त कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना भी शासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
आर्थिक सहायता में देरी पर जताई चिंता
समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मामलों में बाल श्रमिकों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और क्षतिपूर्ति राशि समय पर उपलब्ध नहीं हो रही है। इस पर आयोग ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि आर्थिक सहायता में अनावश्यक विलंब बच्चों के पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इसलिए संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि पात्र प्रत्येक बाल श्रमिक को निर्धारित समय सीमा के भीतर आर्थिक सहायता और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए।
केवल श्रम कानून नहीं, कई कानूनों के तहत होगी कार्रवाई
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि अब बाल श्रम के मामलों में कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तक सीमित नहीं रहेगी।
यदि किसी मामले की परिस्थितियां आवश्यक हों तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम 2015, बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 तथा अन्य लागू कानूनों के तहत भी तत्काल एफआईआर दर्ज कर प्रभावी अभियोजन चलाया जाएगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक दोषी के खिलाफ उपलब्ध सभी कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
दोषी नियोजकों पर होगी कड़ी कार्रवाई
बैठक में बताया गया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 3 के तहत बालकों को नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं धारा 14 और 14-बी के तहत दोषी नियोजकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास के स्पष्ट प्रावधान हैं।
आयोग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा किसी भी मामले में लापरवाही न बरती जाए।
विभागों के बीच मजबूत होगा समन्वय
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जिले में गठित बाल श्रम टास्क फोर्स तथा बंधुआ मजदूर सतर्कता समिति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि संयुक्त अभियान चलाकर बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
इसके साथ ही गृह विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा कौशल विकास विभाग की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
आयोग ने कहा कि बाल श्रमिकों का पुनर्वास केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भर जीवन से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी जिलों में पदस्थ श्रम अधिकारियों और श्रम निरीक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों में बाल श्रमिकों के रेस्क्यू, कानूनी कार्रवाई, दस्तावेजीकरण, पुनर्वास और विभिन्न विभागों के समन्वय संबंधी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
साथ ही समय-समय पर समीक्षा बैठक आयोजित कर कार्रवाई की प्रगति की निगरानी की जाएगी तथा उसकी रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी।
जीरो टॉलरेंस नीति पर करेगा आयोग काम
बैठक के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल श्रम के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का बचपन मजदूरी की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रत्येक मुक्त कराए गए बच्चे के सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को संवेदनशील और जिम्मेदार तरीके से मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल, खेल का मैदान और परिवार है, न कि फैक्ट्री, दुकान, होटल या किसी अन्य श्रमस्थल पर। यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। आयोग का लक्ष्य केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।