सैटेलाइट ब्रॉडबैंड का रास्ता साफ! Starlink, OneWeb और Jio को मिल सकता है बड़ा फायदा
भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर TRAI की सिफारिशों को सचिवों के समूह ने मंजूरी दे दी है। अब प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की सिफारिशों को सचिवों के समूह ने मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही कंपनियों के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियां सक्रिय हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े नियम स्पष्ट होने के बाद इन कंपनियों को भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी।
जानकारी के मुताबिक, सरकार सैटेलाइट कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कंपनियों को अपने Adjusted Gross Revenue यानी AGR का पांच प्रतिशत Spectrum Usage Charge यानी SUC के रूप में देना होगा। स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों पर लागू होने वाली प्रमुख लागत में शामिल होगा।
TRAI ने पिछले साल सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं। अब सचिवों के समूह की मंजूरी मिलने के बाद इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को विशेष महत्व दिए जाने की बात सामने आई है। इन इलाकों में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए Spectrum Usage Charge को अपेक्षाकृत कम रखने का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य उन क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करना है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।
सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक के जरिए जमीन पर बड़े स्तर पर केबल या टावर नेटवर्क स्थापित किए बिना भी दूरदराज के क्षेत्रों तक ब्रॉडबैंड सेवा पहुंचाने की संभावना है। इससे ग्रामीण, पहाड़ी और अन्य कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया स्पष्ट होने से भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने की उम्मीद है। Starlink, OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपभोक्ताओं को भविष्य में सेवा, कवरेज और कीमतों के स्तर पर विकल्प मिल सकते हैं।
अब सभी की नजर केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी पर है। कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी और भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के व्यावसायिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।