केसली महिला एवं बाल विकास कार्यालय की जर्जर इमारत बनी खतरा, तिरपाल के सहारे चल रहा कामकाज

सागर जिले के केसली स्थित महिला एवं बाल विकास कार्यालय की जर्जर इमारत में तिरपाल लगाकर कामकाज किया जा रहा है। इसी भवन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठकें और आधार कार्ड केंद्र भी संचालित होता है। स्थानीय लोगों ने भवन की मरम्मत या नए भवन के निर्माण की मांग करते हुए संभावित हादसे को लेकर चिंता जताई है।

Jul 24, 2026 - 12:29
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केसली महिला एवं बाल विकास कार्यालय की जर्जर इमारत बनी खतरा, तिरपाल के सहारे चल रहा कामकाज

UNITED NEWS OF ASIA. योगेश विश्वकर्मा, सागर l सागर जिले की केसली तहसील में स्थित महिला एवं बाल विकास कार्यालय की जर्जर इमारत अब कर्मचारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कार्यालय का कामकाज आज भी तिरपाल के सहारे संचालित किया जा रहा है। इसके बावजूद इस भवन में प्रतिदिन अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों के लिए यहां पहुंचते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। छत और दीवारों की हालत लगातार खराब होती जा रही है, जिससे बरसात के दिनों में सबसे अधिक परेशानी होती है। पानी टपकने से बचने के लिए कार्यालय के अंदर तिरपाल बांधकर काम किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि भवन सुरक्षित नहीं रह गया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक कार्य नियमित रूप से इसी परिसर में संचालित किए जा रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग का यह कार्यालय केवल अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। यहां समय-समय पर सैकड़ों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की बैठकें आयोजित होती हैं। विभिन्न योजनाओं की समीक्षा, प्रशिक्षण कार्यक्रम और विभागीय बैठकों के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं इसी भवन में एकत्रित होती हैं। ऐसे में भवन की जर्जर स्थिति किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

कार्यालय परिसर में आधार कार्ड केंद्र भी संचालित किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य नागरिकों की आवाजाही रहती है। आधार कार्ड बनवाने और अपडेट कराने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की खराब स्थिति आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनी हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि भवन की मरम्मत या नए कार्यालय भवन के निर्माण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। इसके कारण कर्मचारियों और आम लोगों को जोखिम उठाकर काम करना पड़ रहा है।

बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। छत से पानी रिसने के कारण कार्यालय के रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य आवश्यक सामग्री भी प्रभावित होती है। तिरपाल लगाकर किसी तरह कामकाज जारी रखा जा रहा है, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान है। भवन की मूल समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि विभागीय बैठकों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति रहती है। यदि किसी दिन भवन का कोई हिस्सा गिर जाता है तो बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में सभी लोग भवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का उद्देश्य जनता को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन जब स्वयं कार्यालय ही असुरक्षित भवन में संचालित हो रहा हो तो यह गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने मांग की है कि भवन का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और यदि भवन उपयोग के योग्य नहीं है तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

नागरिकों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि महिला एवं बाल विकास कार्यालय के लिए नए भवन का निर्माण कराया जाए या तब तक किसी सुरक्षित सरकारी भवन में कार्यालय को स्थानांतरित किया जाए। इससे कर्मचारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी संचालन तभी संभव है, जब संबंधित विभाग सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में कार्य करें। महिला एवं बाल विकास विभाग समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों से जुड़ा हुआ विभाग है, इसलिए इसके कार्यालय की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

फिलहाल केसली का महिला एवं बाल विकास कार्यालय तिरपाल के सहारे संचालित हो रहा है और हर दिन कर्मचारी व आम नागरिक संभावित खतरे के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर है कि वे इस जर्जर भवन की समस्या का स्थायी समाधान कब तक सुनिश्चित करते हैं, ताकि किसी संभावित बड़ी दुर्घटना से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।