55 की उम्र में पूरा किया अधूरा सपना: धमतरी की कौशल्या साहू ने मनोविज्ञान में हासिल की एमए की डिग्री

धमतरी की 55 वर्षीय कौशल्या साहू ने कोरोना महामारी में पति को खोने के बाद जीवन से हार मानने के बजाय शिक्षा को नया लक्ष्य बनाया। शादी के 30 साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू कर उन्होंने मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की और यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

Jul 24, 2026 - 12:24
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55 की उम्र में पूरा किया अधूरा सपना: धमतरी की कौशल्या साहू ने मनोविज्ञान में हासिल की एमए की डिग्री

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी की रहने वाली 55 वर्षीय कौशल्या साहू ने अपने जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। कोरोना महामारी के दौरान पति को खोने के बाद जब जीवन कठिन दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने हार मानने के बजाय शिक्षा को अपनी नई ताकत बनाया। करीब 30 वर्षों तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद उन्होंने दोबारा कॉलेज में प्रवेश लिया और वर्ष 2026 में मनोविज्ञान विषय से एमए की डिग्री प्राप्त कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

कौशल्या साहू की सफलता केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्होंने परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ दिया था। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि मन में दृढ़ इच्छा, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत करने का संकल्प हो तो जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।

कौशल्या ने 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी, लेकिन विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। परिवार और गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को निभाते हुए लगभग तीन दशक बीत गए। इस दौरान शिक्षा का सपना कहीं पीछे छूट गया, लेकिन मन में सीखने की इच्छा हमेशा बनी रही।

वर्ष 2020 में कोरोना महामारी ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। पति के निधन ने उन्हें गहरे मानसिक आघात में पहुंचा दिया। जीवन का सबसे कठिन समय होने के बावजूद उन्होंने स्वयं को टूटने नहीं दिया। उन्होंने तय किया कि अब वे अपने अधूरे सपनों को पूरा करेंगी और शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा देंगी।

इस निर्णय के बाद वर्ष 2021 में उन्होंने लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दुर्ग के शासकीय विज्ञान महाविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। इतने लंबे समय बाद फिर से पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था। उम्र, बदल चुकी शिक्षा प्रणाली, नई तकनीक, पारिवारिक जिम्मेदारियां और मानसिक चुनौतियां उनके सामने थीं, लेकिन उन्होंने किसी भी कठिनाई को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया।

कॉलेज में नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के बल पर उन्होंने वर्ष 2024 में स्नातक की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की। स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद भी उनका सीखने का उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया और भिलाई स्थित सेंट थॉमस कॉलेज में मनोविज्ञान विषय से एमए में प्रवेश लिया।

मनोविज्ञान जैसे विषय का चयन भी उनके जीवन अनुभवों से जुड़ा हुआ था। उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ अध्ययन किया और वर्ष 2026 में मनोविज्ञान विषय से स्नातकोत्तर परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए न तो उम्र मायने रखती है और न ही बीता हुआ समय।

कौशल्या साहू अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन के बिना यह सफर संभव नहीं था। उन्होंने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी अपनी सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष देबजानी मुखर्जी, सहायक प्राध्यापक सुमिता सिंह और अंकिता देशमुख के मार्गदर्शन ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और हर कठिन परिस्थिति में उनका आत्मविश्वास बनाए रखा।

कौशल्या का मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का सबसे मजबूत आधार है। उनका कहना है कि यदि किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छूट भी जाए तो परिस्थितियों के बदलने पर दोबारा शुरुआत की जा सकती है। सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत कर सकता है।

उनकी सफलता ने समाज में विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश दिया है। कई महिलाएं विवाह, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। कौशल्या साहू की कहानी बताती है कि यदि परिवार का सहयोग और स्वयं पर विश्वास बना रहे तो वर्षों बाद भी शिक्षा के अधूरे सपनों को पूरा किया जा सकता है।

आज कौशल्या साहू धमतरी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका संघर्ष, आत्मविश्वास और शिक्षा के प्रति समर्पण यह संदेश देता है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है। वे भविष्य में भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए समाज के लिए उपयोगी कार्य करने और शिक्षा के माध्यम से लोगों को प्रेरित करने का लक्ष्य रखती हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिलाती है कि सपनों को पूरा करने के लिए सबसे जरूरी चीज मजबूत इरादे और निरंतर प्रयास हैं।