शिवाय हॉस्पिटल में 600 ग्राम के विशाल गर्भाशय की सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, डेढ़ साल की पीड़ा से मिली राहत

कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में 46 वर्षीय महिला की जटिल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला पिछले करीब डेढ़ साल से अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द की समस्या से परेशान थीं। जांच में गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड पाया गया, जिसके कारण गर्भाशय का वजन करीब 600 ग्राम और आकार 16 से 18 सप्ताह के गर्भ के समान हो गया था। डॉ. पूर्णिमा सुरभि और डॉ. पूजा कुंडू की अगुवाई में मेडिकल टीम ने 25 जुलाई 2026 को टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी और बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी की। सफल सर्जरी के बाद महिला की हालत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

Sep 7, 2026 - 15:03
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शिवाय हॉस्पिटल में 600 ग्राम के विशाल गर्भाशय की सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, डेढ़ साल की पीड़ा से मिली राहत

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l जिले के शिवाय हॉस्पिटल में 46 वर्षीय महिला की जटिल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला पिछले करीब डेढ़ साल से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव और असहनीय दर्द की समस्या से परेशान थीं। जांच के दौरान उनके गर्भाशय में 10 से 12 सेंटीमीटर का विशाल फाइब्रॉयड पाया गया। इसके कारण गर्भाशय का आकार सामान्य से बढ़कर करीब 16 से 18 सप्ताह के गर्भ के समान हो गया था और उसका वजन लगभग 600 ग्राम बताया गया।

महिला को लंबे समय से अत्यधिक रक्तस्राव की समस्या थी। स्थिति यह थी कि उन्हें दिनभर में करीब आठ पैड तक बदलने पड़ते थे। लगातार रक्तस्राव और दर्द के कारण उनके सामान्य जीवन पर भी इसका असर पड़ रहा था। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने के बाद उन्होंने शिवाय हॉस्पिटल में उपचार कराया।

पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी में गर्भाशय के भीतर करीब 10 से 12 सेंटीमीटर का बड़ा फाइब्रॉयड सामने आया। मामले की जटिलता को देखते हुए सर्जन डॉ. पूर्णिमा सुरभि और गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा कुंडू की अगुवाई में मेडिकल टीम ने लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

25 जुलाई 2026 को महिला की टोटल लेप्रोस्कोपिक हिस्टरेक्टॉमी यानी TLH और बाइलेटरल साल्पिंगेक्टॉमी की गई। अस्पताल के अनुसार, जटिल सर्जरी के दौरान लेप्रोस्कोपिक मोर्सेलेशन तकनीक की सहायता से बड़े ट्यूमर और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। सर्जरी के दौरान किसी आपातकालीन स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।

सफल ऑपरेशन के बाद महिला की स्वास्थ्य स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। अस्पताल के अनुसार, मरीज पूरी तरह स्वस्थ और हेमोडायनामिक रूप से स्थिर होने के बाद डिस्चार्ज कर दी गईं। लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत मिलने के बाद मरीज और उनके परिजनों ने डॉ. पूर्णिमा सुरभि सहित पूरी मेडिकल टीम के प्रति आभार जताया।

परिजनों के अनुसार, आधुनिक चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के प्रयास से महिला को राहत मिली। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, इस तरह की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे मरीज को पारंपरिक बड़े चीरे वाली सर्जरी की तुलना में रिकवरी में सुविधा मिल सकती है।

शिवाय हॉस्पिटल के अनुसार, अस्पताल में बिना बड़े चीरे के लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है और इस मामले को जिले में आधुनिक स्त्री रोग संबंधी सर्जरी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर बताया गया है।

यह मामला महिलाओं में लंबे समय तक रहने वाले अत्यधिक रक्तस्राव और दर्द जैसी समस्याओं की जांच एवं समय पर उपचार की आवश्यकता को भी सामने लाता है। चिकित्सकीय जांच में फाइब्रॉयड की पुष्टि होने के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की प्रक्रिया तय की जाती है।