‘पाकिस्तान के बाद MP के हिंदू ज्यादा खतरे में’, सागर शराबकांड पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सरकार पर हमला
सागर जिले के बंडा में जहरीली शराबकांड को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंघार ने दावा किया कि कथित जहरीली शराब धार जिले से आई थी और मामले में प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुआवजा बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सामने आए कथित जहरीली शराबकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से चर्चा के दौरान सिंघार ने शराब की आपूर्ति, प्रशासनिक कार्रवाई और मृतकों के परिवारों को दिए जा रहे मुआवजे को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। हालांकि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
उमंग सिंघार ने दावा किया कि सागर में लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार बताई जा रही शराब उत्तर प्रदेश से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के धार जिले से आई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की मांग करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सिंघार का आरोप है कि शराब निर्माण और सप्लाई की पूरी प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों तथा अधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच जरूरी है।
नेता प्रतिपक्ष ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठनों पर भी राजनीतिक सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली घटनाओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया अलग-अलग दिखाई देती है। सिंघार ने सागर की घटना में लोधी समाज के लोगों की मौत का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद की सक्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रह्लाद पटेल और उमा भारती की चुप्पी को लेकर भी सवाल किए।
सिंघार ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एसपी अनुराग सुजानिया की पदस्थापना वाले क्षेत्रों में शराब से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए उनकी भूमिका की जांच की मांग की। इसके अलावा आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना और संजय दुबे को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। सिंघार ने पूछा कि डिस्टिलरी तक मिथेनॉल कैसे पहुंचा और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या विभाग की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
उन्होंने शराब के ब्रांड को लेकर भी प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाया। सिंघार के अनुसार रॉयल ब्रांड और सागर गोल्ड शराब को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने दावा किया कि सागर गोल्ड के संबंध में पहले कार्रवाई की गई और बाद में प्रतिबंध हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शराब की गुणवत्ता और बिक्री की निगरानी में कहीं लापरवाही हुई या नहीं।
मुआवजे को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मृतकों के परिवारों को घोषित चार लाख रुपये की सहायता को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये देने की मांग की। सिंघार ने दावा किया कि स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले भी अवैध शराब की शिकायतें की थीं, लेकिन उन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सागर शराबकांड को लेकर विपक्ष के आरोपों के बीच अब मामले की निष्पक्ष जांच और शराब की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशासनिक जांच में ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शराब की गुणवत्ता, वितरण और निगरानी में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई थी।