लंदन के ऐतिहासिक गुरुद्वारे पहुंचे मोहन भागवत, सिख समुदाय से की बातचीत, बोले- एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में ब्रिटेन पहुंचे, जहां उन्होंने लंदन के ऐतिहासिक खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका और सिख समुदाय के लोगों से बातचीत की। उन्होंने रुमाला साहिब भेंट किया और कड़ा प्रसाद ग्रहण किया। भागवत ने भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए विविधता और एकता को लेकर कहा कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है। उन्होंने विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर में जन्माष्टमी समारोह में भी हिस्सा लिया।

Sep 7, 2026 - 12:18
 0  2
लंदन के ऐतिहासिक गुरुद्वारे पहुंचे मोहन भागवत, सिख समुदाय से की बातचीत, बोले- एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं

UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तीन देशों की यात्रा के अंतिम पड़ाव पर ब्रिटेन पहुंचे हैं। लंदन प्रवास के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर मत्था टेका और सिख समुदाय के लोगों से संवाद किया। यह गुरुद्वारा भारत के बाहर पुराने गुरुद्वारों में शामिल है और वर्ष 1908 से अस्तित्व में बताया जाता है। भागवत की गुरुद्वारा यात्रा को धार्मिक और सामाजिक संवाद के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुरुद्वारा पहुंचने के दौरान मोहन भागवत ने रुमाला साहिब भेंट किया और कड़ा प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन से भी बातचीत की। इस दौरान सिख परंपराओं और समुदाय से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के अनुसार, भागवत ने लंदन के विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का भी दौरा किया, जहां उस समय जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था। उन्होंने वहां धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया और मंदिर परिसर में मौजूद लोगों से मुलाकात की।

लंदन यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी सभा को भी संबोधित किया। ‘सेलिब्रेशन ऑफ वननेस’ यानी ‘एकता का उत्सव’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विविधता, सामाजिक समरसता और एकता को लेकर अपने विचार रखे। भागवत ने कहा कि एकता के लिए एकरूपता जरूरी नहीं है। उनके अनुसार अलग-अलग विचारों, परंपराओं, पूजा पद्धतियों और जीवनशैलियों के बावजूद समाज में एकता कायम रह सकती है।

भागवत ने ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ किसी विशेष धर्म, पूजा पद्धति या जीवनशैली को मानने तक सीमित नहीं है, बल्कि विविधताओं को स्वीकार करने और साथ लेकर चलने की भावना से जुड़ा है। उनके मुताबिक समाज में सभी लोगों का एक जैसा होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग विचार और मान्यताएं होने के बावजूद एकता और सामूहिक भावना कायम रखी जा सकती है।

आरएसएस की ओर से बताया गया है कि मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के माध्यम से संगठन विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों, शिक्षाविदों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के साथ संवाद बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य हिंदुत्व और भारतीय सभ्यता को लेकर पश्चिमी देशों में मौजूद धारणाओं पर संवाद करना तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के साथ भारत के सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टिकोण पर चर्चा करना है।

लंदन में गुरुद्वारा यात्रा, स्वामीनारायण मंदिर में जन्माष्टमी समारोह में सहभागिता और भारतीय मूल के लोगों को संबोधन के जरिए भागवत ने धार्मिक एवं सामाजिक विविधता के बीच संवाद और एकता पर जोर दिया। ब्रिटेन यात्रा के दौरान उनकी इन गतिविधियों को आरएसएस के वैश्विक संपर्क अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।