एनएच-343 से सटी पट्टा भूमि की बिक्री पर विवाद, आदिवासी समाज ने उठाए सवाल

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में एनएच-343 से सटी पट्टा भूमि की कथित अवैध बिक्री और नामांतरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी समाज ने राजस्व अधिकारियों और भूमाफियाओं की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जांच और रजिस्ट्री निरस्त करने की मांग की है।

Feb 11, 2026 - 20:47
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एनएच-343 से सटी पट्टा भूमि की बिक्री पर विवाद, आदिवासी समाज ने उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-343 से सटी पट्टा भूमि के कथित अवैध क्रय-विक्रय को लेकर विवाद सामने आया है। तहसील बलरामपुर अंतर्गत राजस्व निरीक्षक भवनौरा के ग्राम लुरगुटा स्थित खसरा नंबर 288/3 की भूमि की बिक्री और नामांतरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय आदिवासी समाज और ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त भूमि शासन द्वारा पट्टे के रूप में प्रदत्त थी, जिसका विक्रय करने से पूर्व कलेक्टर की अनुमति आवश्यक होती है। आरोप है कि बिना अनुमति के भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि नेशनल हाईवे-343 के फोरलेन निर्माण के लिए क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण संबंधित भूमि पर क्रय-विक्रय प्रतिबंधित होना चाहिए। इसके बावजूद भूमि की रजिस्ट्री और नामांतरण होने से राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और जमीन दलालों की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिले में पहले भी भूमाफियाओं और राजस्व विभाग की कथित मिलीभगत से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिससे कई कृषक परिवार प्रभावित हुए हैं। समाज के लोगों ने यह भी दावा किया है कि कुछ मामलों में आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जमीन दलाल आदिवासी वर्ग की महिलाओं से वैवाहिक संबंध स्थापित कर उनके नाम पर भूमि खरीदकर बाद में ऊंचे दामों में बेचने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार की गतिविधियों से आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ने की बात कही जा रही है।

इस मामले में आराधना टोप्पो के नाम पर भूमि खरीदे जाने को लेकर भी जांच की मांग उठी है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने कथित रूप से संबंधित रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से उप पंजीयक, तहसीलदार और पटवारी की भूमिका की जांच करने, भूमि रजिस्ट्री दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि करने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की है कि भूमि विक्रय के लिए कलेक्टर की अनुमति ली गई थी या नहीं।

अब इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर स्थानीय लोगों और आदिवासी समाज की नजरें टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते उचित जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है।