"गुरु पूर्णिमा पर अशोका पब्लिक स्कूल में भक्ति,संस्कृति और गुरु वंदना का अनुपम संगम,जय गुरुदेव के उद्घोष से गूंजा विद्यालय परिसर"

कवर्धा स्थित अशोका पब्लिक स्कूल में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रेरक संबोधनों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया।

Jul 29, 2026 - 14:43
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"गुरु पूर्णिमा पर अशोका पब्लिक स्कूल में भक्ति,संस्कृति और गुरु वंदना का अनुपम संगम,जय गुरुदेव के उद्घोष से गूंजा विद्यालय परिसर"

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अशोका पब्लिक स्कूल, कवर्धा में बुधवार को भक्ति, संस्कृति और गुरु वंदना से ओत-प्रोत भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार और "जय गुरुदेव" के उद्घोष के बीच विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार ने अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम की शुरुआत विशेष प्रार्थना सभा से हुई। विद्यालय के संचालक पवन देवांगन एवं संचालिका सारिका देवांगन ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि तथा आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्कृत आचार्य दीपक मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन संपन्न कराया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

विशेष प्रार्थना सभा के लिए विद्यार्थियों ने स्वयं आकर्षक मंच सज्जा तैयार कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गुरु महिमा पर आधारित गीत, कविता, प्रेरणादायी भाषण एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी का मन मोह लिया। पूरे विद्यालय में गुरु वंदना और "जय गुरुदेव" के स्वर गूंजते रहे।

इस अवसर पर पवन देवांगन ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाशपुंज होता है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरु का मार्गदर्शन और आत्मचिंतन किसी भी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और संस्कार का ऐसा संदेश दिया, जो आज भी समाज को प्रेरित करता है।

उन्होंने आगे कहा कि श्री श्री रविशंकर ने प्रेम, शांति, सेवा और मानवता का संदेश देकर विश्वभर में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया है। आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से उन्होंने करोड़ों लोगों को तनावमुक्त जीवन और मानवीय मूल्यों का महत्व समझाया। उनका संदेश आज भी समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

सारिका देवांगन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में भी गुरु का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन जीवन जीने की सही दिशा गुरु ही प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, अनुशासन और गुरु-शिष्य परंपरा को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान व्यक्त किया। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य, श्रेष्ठ चरित्र और निरंतर सफलता का आशीर्वाद दिया। यह भावपूर्ण दृश्य सभी के लिए प्रेरणादायी रहा।

समापन अवसर पर प्राचार्य लोकनाथ देवांगन ने कहा कि गुरु जीवन के ऐसे प्रकाश स्तंभ हैं, जो स्वयं तपकर दूसरों के जीवन को प्रकाशित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरुजनों का सम्मान करने, माता-पिता का आदर करने, अनुशासन का पालन करने तथा भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाने का संकल्प दिलाया। संकल्प के बाद पूरे विद्यालय परिसर में "जय गुरुदेव" के गगनभेदी उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए श्रद्धा, संस्कार और प्रेरणा का अविस्मरणीय संदेश छोड़ गया।