नामांतरण या नोटांतरण? तिल्दा-नेवरा नगर पालिका पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप!
तिल्दा-नेवरा नगर पालिका परिषद में नामांतरण (म्यूटेशन) प्रक्रिया को लेकर रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक पीड़ित ने आरोप लगाया कि पहले करीब 80 हजार रुपये और बाद में 60 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायत के बाद सीएमओ शर्मा ने मामले में हस्तक्षेप किया, कथित दावों की जांच कराई और बिना किसी अतिरिक्त राशि के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई। मामले के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा l तिल्दा-नेवरा नगर पालिका परिषद एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला नामांतरण (म्यूटेशन) प्रक्रिया से जुड़ा है, जहां एक पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसके कार्य के एवज में पहले करीब 80 हजार रुपये और बाद में 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। हालांकि, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शर्मा के हस्तक्षेप के बाद बिना किसी राशि के उसका नामांतरण कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि नगर पालिका पहुंचने पर उसे बताया गया कि नामांतरण कराने के लिए "5 प्रतिशत राशि" देना अनिवार्य है। आरोप है कि यह मांग नगर पालिका अध्यक्ष के पति की ओर से की गई। इसके बाद पीड़ित ने एक स्थानीय पार्षद से मदद मांगी, लेकिन वहां भी कथित रूप से 60 हजार रुपये देने की बात कही गई। रिश्वत की मांग से परेशान होकर पीड़ित ने सीधे सीएमओ शर्मा से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों और पक्षों को बुलाकर जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार, जब कथित तौर पर "5 प्रतिशत लेने का प्रस्ताव" होने की बात कही गई तो सीएमओ ने तत्काल उस प्रस्ताव की प्रति प्रस्तुत करने को कहा। आरोप है कि कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके बाद सीएमओ के निर्देश पर पीड़ित का नामांतरण बिना किसी अतिरिक्त राशि के पूरा कर दिया गया।
घटना के बाद नगर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि नामांतरण जैसे सामान्य शासकीय कार्यों में भी कथित रूप से रिश्वत की मांग हो रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।