कोरबा में प्रतिबंधित लकड़ी से भरा माज़दा वाहन जब्त, वन विभाग ने शुरू की जांच
कोरबा जिले के भैसमा वनमंडल क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित लकड़ी से भरे एक माज़दा वाहन को जब्त किया है। मामले में लकड़ी के परिवहन, दस्तावेजों की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप राव, कोरबा l जिले के भैसमा वनमंडल क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित लकड़ी से भरे एक माज़दा वाहन को जब्त किया है। वाहन में खमार और नीलगिरी की लकड़ी लोड मिली, जिसे वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले में वन अधिनियम के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
वन विभाग को सूचना मिली थी कि एक माज़दा वाहन संदिग्ध परिस्थितियों में सालियाभाटा क्षेत्र में खड़ा है। सूचना मिलते ही वन अधिकारी प्रमोद कुमार निरगुण अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और वाहन की जांच की। जांच के दौरान वाहन क्रमांक CG10 BM 1447 में खमार एवं नीलगिरी की लकड़ी लदी हुई पाई गई।
प्रारंभिक जांच के बाद वन विभाग ने वाहन को जब्त कर कोरबा मुख्यालय स्थित कोसाबाड़ी डिपो लाया, जहां लकड़ी और वाहन का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जब्ती की कार्रवाई के बाद पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कोरबा रेंजर मृत्युंजय शर्मा ने बताया कि वाहन और उसमें लदी लकड़ी की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि लकड़ी का परिवहन किस उद्देश्य से किया जा रहा था, परिवहन से संबंधित दस्तावेज वैध थे या नहीं तथा इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही है। जांच पूरी होने के बाद वन अधिनियम के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग यह भी जांच कर रहा है कि लकड़ी अधिकृत स्रोत से लाई गई थी या अवैध रूप से कटाई कर परिवहन किया जा रहा था। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हाल के वर्षों में कोरबा और आसपास के वन क्षेत्रों में अवैध लकड़ी कटाई और परिवहन के मामलों को रोकने के लिए वन विभाग लगातार अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में यह कार्रवाई भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग का कहना है कि वन संपदा की सुरक्षा और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
हालांकि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि जांच कितनी प्रभावी होगी और दोषियों तक कार्रवाई पहुंचेगी या नहीं। फिलहाल वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।