कवर्धा में मधुमक्खी पालन पर 7 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, किसानों को स्वरोजगार की दिशा में मिल रही नई राह

कवर्धा में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 7 दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें 28 किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अतिरिक्त आय के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

Mar 20, 2026 - 17:53
 0  4
कवर्धा में मधुमक्खी पालन पर 7 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, किसानों को स्वरोजगार की दिशा में मिल रही नई राह

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, कवर्धा द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के सहयोग से “मधुमक्खी पालन पर सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम” का शुभारंभ किया गया है। यह प्रशिक्षण 18 मार्च से 24 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ग्रामों जैसे पोलमी, बोड़ला, कुकदुर, भंगीटोला और लखनपुर से कुल 28 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं। सभी प्रतिभागियों को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में आवासीय सुविधा के साथ सात दिनों तक सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण

यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. वी.के. त्रिपाठी और निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण संचालित हो रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद सदस्य शिवकुमार धुर्वे और डॉ. बी.पी. त्रिपाठी की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक प्रभावी साधन है और कबीरधाम जिले में इसके विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।

स्वरोजगार की दिशा में प्रेरणा

जनपद सदस्य शिवकुमार धुर्वे ने अपने संबोधन में किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बताते हुए ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बताया।

तकनीकी सत्रों में मिली महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. सी.पी. रहांगडाले ने प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन की मूलभूत जानकारी, प्रबंधन तकनीकों और आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया।

प्रथम दिवस के तकनीकी सत्र में डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने मधुमक्खियों के प्रकार, उनकी उपयोगिता और जिले में मधुमक्खी पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. सी.पी. रहांगडाले ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन की प्रक्रिया समझाई।

इसके अलावा डॉ. एन.सी. बंजारा ने उद्यानिकी फसलों के साथ मधुमक्खी पालन के समन्वय से होने वाले लाभों की जानकारी दी, जिससे फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि हो सकती है।

व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रायोगिक अभ्यास और प्रक्षेत्र भ्रमण के माध्यम से भी सीखने का अवसर दिया जाएगा। इससे किसान इस तकनीक को आसानी से समझकर अपने क्षेत्र में लागू कर सकेंगे।

इस अवसर पर केवीके के वैज्ञानिक डॉ. बी.एस. परिहार, इंजीनियर टी.एस. सोनवानी और योगेश कुमार कौशिक सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।