रायपुर में जारी बयान में मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में योग्यता और निष्ठा का कोई महत्व नहीं रह गया है। वहां टिकट केवल पैसों के आधार पर दिए जाते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस का ‘मोहब्बत की दुकान’ का नारा दरअसल ‘टिकट की दुकान’ में बदल चुका है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि हरियाणा में सामने आया यह वीडियो कोई अपवाद नहीं है, बल्कि कांग्रेस की कार्यसंस्कृति का हिस्सा है। जब महिला कांग्रेस की पदाधिकारी ही टिकट के बदले लेन-देन की बात सार्वजनिक रूप से करती नजर आ रही हैं, तो इससे साफ समझा जा सकता है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व किस तरह की राजनीति कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में भी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव के दौरान अपने ही नेतृत्व पर टिकट बेचने के आरोप लगाए थे। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान कई दावेदारों ने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल पैसे वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई।
मंत्री कश्यप ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब किसी प्रत्याशी को लाखों-करोड़ों रुपये देकर टिकट लेना पड़ता है, तो उसके बाद वह जनता की सेवा नहीं बल्कि अपने निवेश की वसूली में लग जाता है। ऐसे में जनता के विकास की उम्मीद करना बेकार है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राजनीति को सेवा के बजाय व्यापार बना दिया है। टिकट वितरण की इस कथित सौदेबाजी ने पार्टी की साख को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। कश्यप ने कहा कि हरियाणा का यह वीडियो उस व्यवस्था का एक और उदाहरण है, जिसे कांग्रेस देशभर में चला रही है।
वन मंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता पहले ही कांग्रेस की इस राजनीति को समझ चुकी है और पिछले चुनावों में उसे जवाब दे चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों की जनता भी कांग्रेस की इस कथित कार्यप्रणाली को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
मंत्री Kedar Kashyap ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस में अब ‘जनसेवा’ नहीं बल्कि ‘जेब सेवा’ के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।