सराईपाली के जंगलों में अवैध ईंट भट्ठों का जाल, पर्यावरण और राजस्व को बड़ा नुकसान
कोरबा जिले के सराईपाली क्षेत्र में अवैध ईंट भट्ठों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। शासकीय भूमि पर कब्जा, अवैध खनन और कोयले के उपयोग से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA राहुल गुप्ता, कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर सराईपाली और उसके आसपास के जंगलों में अवैध ईंट भट्ठों का जाल फैल चुका है, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सोनपुरी के अंतर्गत आने वाले सराईपाली गांव और रुकबहरी के आसपास बड़े पैमाने पर लाल ईंट का निर्माण किया जा रहा है। यह पूरा कारोबार बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि भट्ठा संचालकों द्वारा शासकीय जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और जेसीबी मशीनों के जरिए अवैध रूप से मिट्टी का खनन किया जा रहा है।
इस अवैध खनन से न केवल जमीन की संरचना प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। जंगलों में बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई और पेड़ों की कटाई से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।
मौके से मिली जानकारी के अनुसार, इन ईंट भट्ठों में भारी मात्रा में कोयले का उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह कोयला भी वैध स्रोतों से नहीं, बल्कि अवैध तरीके से लाया जा रहा है। भट्ठों के आसपास पड़े कोयले के बड़े-बड़े ढेर इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह गतिविधि संगठित तरीके से चलाई जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जिला प्रशासन राख (फ्लाई ऐश) के उपयोग को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लाल ईंट के इस अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे प्रशासन की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ नजर आता है।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जनदर्शन में शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद नायब तहसीलदार द्वारा टीम के साथ छापामार कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके बावजूद भट्ठों का संचालन बंद नहीं हुआ। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले में खनिज विभाग की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। राकेश वर्मा, खनिज अधिकारी ने कहा है कि अवैध रेत, मुरूम और ईंट भट्ठों के संचालन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही जांच टीम भेजी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस अवैध गतिविधि पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे न केवल पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान होगा, बल्कि शासन को राजस्व की भी बड़ी हानि होगी।
कुल मिलाकर, सराईपाली क्षेत्र में अवैध ईंट भट्ठों का यह नेटवर्क प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और कब तक इस अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।