जवेली पंचायत के ग्रामीणों ने की वन अधिकार पट्टा की मांग, कहा – मजबूरी में 10-15 रुपये किलो में बेच रहे धान

कांकेर जिले के जवेली पंचायत के ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन देकर वन अधिकार पट्टा की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पट्टा न मिलने से वे शासन की योजनाओं से वंचित हैं और धान 10-15 रुपये किलो में बेचने को विवश हैं। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

Oct 28, 2025 - 18:44
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जवेली पंचायत के ग्रामीणों ने की वन अधिकार पट्टा की मांग, कहा – मजबूरी में 10-15 रुपये किलो में बेच रहे धान

UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के ग्राम पंचायत जवेली के ग्रामीणों ने आज कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत कर वन अधिकार पट्टा (Forest Rights Patta) की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक भूमि पर खेती-बाड़ी कर जीवन-यापन कर रहे हैं, परंतु अब तक उन्हें भूमि का स्वामित्व प्रमाणपत्र यानी वन अधिकार पट्टा प्राप्त नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस कारण उन्हें शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। न तो वे कृषि ऋण ले पा रहे हैं, न ही समर्थन मूल्य पर फसल बेचने में सक्षम हैं। मजबूरी में उन्हें बिचौलियों को मात्र 10 से 15 रुपये प्रति किलो की दर से धान बेचना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि शासन की नीति के अनुसार वर्ष 2005 तक जो लोग भूमि पर काबिज हैं, उन्हें पट्टा देने का प्रावधान है, परंतु अब तक उनके मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत जवेली के माध्यम से एक सामूहिक आवेदन तैयार कर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भी सौंपा है, परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि बिना पट्टा के वे न तो कृषि योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं और न ही मकान निर्माण के लिए शासन से कोई सहायता प्राप्त कर पा रहे हैं।

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट लिखा है कि वे अब आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, जिसके लिए भूमि स्वामित्व अधिकार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि उनके प्रकरण की प्राथमिकता से जांच की जाए और पात्र ग्रामीणों को शीघ्र वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने शासन से अपील की है कि वे उनके संघर्ष को समझते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लें ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें और शासन की योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हो सकें।