'मोर गांव मोर पानी' अभियान से कबीरधाम में लौटी जल समृद्धि, बारिश में लबालब हुई जल संरचनाएं

कबीरधाम जिले में 'मोर गांव मोर पानी' महाअभियान के तहत निर्मित 253 आजीविका डबरी, 25 नवा तरिया और 4,975 कंटूर ट्रेंच में बारिश का पानी भरने लगा है। इन संरचनाओं के माध्यम से लगभग 4.32 लाख घन मीटर और कंटूर ट्रेंच में 53.72 लाख लीटर वर्षा जल का संरक्षण होगा। अभियान से जल संरक्षण के साथ रोजगार और ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिली है।

Jul 8, 2026 - 17:14
Jul 8, 2026 - 17:26
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'मोर गांव मोर पानी' अभियान से कबीरधाम में लौटी जल समृद्धि, बारिश में लबालब हुई जल संरचनाएं

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'मोर गांव मोर पानी' महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब बारिश के मौसम में दिखाई देने लगे हैं। भीषण गर्मी के दौरान विकसित भारत जी-राम-जी योजना और मनरेगा के तहत तैयार की गई जल संरचनाएं अब वर्षा जल से लबालब हो रही हैं। इससे जिले में जल संरक्षण, सिंचाई, रोजगार और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जिले में अब तक 253 आजीविका डबरी और 25 नवा तरिया का निर्माण किया जा चुका है। इन दोनों संरचनाओं में क्रमशः 2,25,170 घन मीटर और 2,07,234 घन मीटर वर्षा जल का संग्रहण होगा। इस प्रकार कुल 4,32,404 घन मीटर पानी का संरक्षण संभव होगा। इसके अलावा 4,975 कंटूर ट्रेंच के माध्यम से लगभग 53 लाख 72 हजार लीटर वर्षा जल का संचयन किया जाएगा।

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि कबीरधाम जिला वर्षा की असमानता वाले क्षेत्र में आता है। ऐसे में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष से विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के अंतर्गत सोख्ता गड्ढे, बोरवेल रिचार्ज पिट, नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण, नालों की सफाई और पहाड़ी क्षेत्रों में कंटूर ट्रेंच जैसे कार्य कराए गए हैं। इन प्रयासों से गांवों में जल समृद्धि लौटती दिखाई दे रही है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका को भी जोड़ा गया है। आजीविका डबरी और नवा तरिया बनने से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, मत्स्य पालन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे।

अभियान के तहत निर्मित 253 आजीविका डबरियों पर लगभग 1,85,248 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ और ग्रामीणों को 3 करोड़ 68 लाख 87 हजार 700 रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया। इन डबरियों से लगभग 253 एकड़ भूमि की सिंचाई संभव होगी।

वहीं 25 नवा तरिया के निर्माण से 1,03,751 मानव दिवस का रोजगार मिला और 1 करोड़ 80 लाख 57 हजार रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया। इन जल संरचनाओं से लगभग 290 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं विकसित होंगी।

इसके अलावा सहसपुर लोहारा विकासखंड के गागंपुर और बड़ौदाकला ग्राम पंचायतों में कुल 4,975 कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इससे 5,049 मानव दिवस का रोजगार मिला और 13 लाख 17 हजार 789 रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया। इन संरचनाओं से भू-जल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और हरियाली बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

जिला प्रशासन का मानना है कि 'मोर गांव मोर पानी' महाअभियान भविष्य में जल संकट से निपटने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि आधारित आजीविका को स्थायी आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।