परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक निर्धारित था। इस भर्ती परीक्षा के लिए जिले में कुल 4859 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 3704 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। वहीं 1155 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। इस प्रकार कुल उपस्थिति लगभग 76.22 प्रतिशत दर्ज की गई, जो एक संतोषजनक आंकड़ा माना जा रहा है।
परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए मंडल द्वारा पहले से ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया। सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से दो घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य किया गया था, ताकि समय पर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से परीक्षा केंद्रों पर महिला एवं पुरुष पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। अभ्यर्थियों की सघन फ्रिस्किंग (शारीरिक जांच) की गई और केवल उन्हीं को प्रवेश दिया गया, जिनके पास मूल फोटोयुक्त पहचान पत्र मौजूद था। इसके अलावा पहचान सत्यापन के लिए प्रत्येक केंद्र पर एक पुरुष और एक महिला वीक्षक की नियुक्ति की गई थी, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
मंडल के निर्देशानुसार परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले, यानी सुबह 9:30 बजे ही सभी परीक्षा केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए थे। इससे देर से आने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं मिल सका, जो नियमों के सख्त पालन को दर्शाता है।
परीक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। साथ ही उड़नदस्ता दल भी गठित किए गए थे, जिन्होंने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्था का जायजा लिया। इन टीमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।
पूरे जिले में परीक्षा के दौरान कहीं से भी किसी प्रकार की अव्यवस्था या अनुचित गतिविधि की सूचना नहीं मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन द्वारा की गई तैयारियां पूरी तरह सफल रहीं। अभ्यर्थियों ने भी परीक्षा व्यवस्था को संतोषजनक बताया और शांतिपूर्ण माहौल में परीक्षा देने का अनुभव साझा किया।
कुल मिलाकर, कबीरधाम जिले में मंडी उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का सफल आयोजन प्रशासनिक दक्षता और बेहतर समन्वय का उदाहरण बना। यह परीक्षा न केवल अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर थी, बल्कि इससे यह भी साबित हुआ कि उचित योजना और सख्त निगरानी के साथ किसी भी बड़े आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न किया जा सकता है।