बैठक में जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही सड़कों पर रहने वाले, भिक्षावृत्ति, अपशिष्ट संग्रहण एवं बाल श्रम में संलग्न बच्चों की पहचान, संरक्षण और पुनर्वास को लेकर भी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई।
बैठक में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा वर्ष 2028-29 तक छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत वर्ष 2025-26 तक कबीरधाम जिले के कुल 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, नगरीय प्रशासन तथा अन्य विभागों के साथ समन्वय कर जिलेभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों, ग्राम पंचायतों, धार्मिक स्थलों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जा रहे हैं ताकि समाज में बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर जनजागरूकता बढ़ाई जा सके।
बैठक में सड़कों पर रहने वाले बच्चों, भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों, कचरा बीनने वाले बच्चों तथा बाल श्रम में लगे बच्चों के संरक्षण, सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक देखरेख, परामर्श, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में वे बच्चे भी शामिल किए जा रहे हैं जो दिन में सड़कों पर रहते हैं और रात में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में अपने परिवार के पास लौटते हैं, साथ ही वे बच्चे भी चिन्हित किए जा रहे हैं जो अपने परिवार के साथ ही सड़कों पर जीवन यापन कर रहे हैं।
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि बेसहारा एवं देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों से जुड़े अभियानों को जिले में और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाया जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और ऐसे बच्चों को संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा पुनर्वास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह उन्मूलन और बच्चों के संरक्षण के बिना जिले का समग्र सामाजिक विकास संभव नहीं है। इसलिए इन दोनों विषयों को प्राथमिकता में रखते हुए सतत, संवेदनशील और प्रभावी कार्रवाई की जाए। बैठक में यह भी तय किया गया कि आगे भी नियमित रूप से समीक्षा कर प्रगति की निगरानी की जाएगी, ताकि कबीरधाम जिले को बाल विवाह मुक्त और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण वाला जिला बनाया जा सके।