खरोरा देसी शराब दुकान में तिलक साहू की पुनः पदस्थापना पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

खरोरा स्थित देसी शराब दुकान में तिलक साहू को दोबारा सुपरवाइजर बनाए जाने पर स्थानीय स्तर पर विरोध और संदेह सामने आए हैं। वर्ष 2025 में कथित अवैध शराब बिक्री के मामले में हटाए गए कर्मचारी की पुनः नियुक्ति को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

Feb 26, 2026 - 16:46
Feb 26, 2026 - 18:05
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खरोरा देसी शराब दुकान में तिलक साहू की पुनः पदस्थापना पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर | खरोरा स्थित देसी शराब दुकान में तिलक साहू को पुनः सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ किए जाने को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति को पूर्व में गंभीर आरोपों के बाद पद से हटाया गया था, उसी को उसी दुकान में दोबारा जिम्मेदारी सौंपना विभागीय कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में खरोरा देसी शराब दुकान में कथित रूप से बाहरी शराब लाकर अवैध बिक्री किए जाने का मामला सामने आया था। मामले की सूचना मिलते ही तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी आबकारी DC राजेश शर्मा द्वारा कार्रवाई करते हुए संबंधित सुपरवाइजर को पद से हटा दिया गया था। उस समय यह भी चर्चा रही कि पूरे मामले में कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध थी, हालांकि इन आरोपों की विधिवत और निष्पक्ष जांच अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

अब उसी व्यक्ति को पुनः खरोरा देसी शराब दुकान में सुपरवाइजर बनाए जाने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष है। लोगों का कहना है कि यदि पूर्व में अनियमितताओं के आरोप लगे थे और कार्रवाई भी की गई थी, तो बिना जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए दोबारा उसी स्थान पर पदस्थापना का औचित्य क्या है। आम नागरिक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे जिले या प्रदेश में अन्य योग्य और स्वच्छ छवि वाले सुपरवाइजर उपलब्ध नहीं थे।

होली जैसे बड़े और संवेदनशील पर्व के ठीक पहले इस प्रकार की नियुक्ति को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। त्योहारों के दौरान शराब की मांग और बिक्री में वृद्धि को देखते हुए अवैध गतिविधियों की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे समय में विवादित पृष्ठभूमि वाले कर्मचारी को उसी दुकान में तैनात करना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

प्रदेश सरकार द्वारा कानून व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन आबकारी से जुड़े मामलों में बार-बार सामने आ रही शिकायतें विभागीय पारदर्शिता पर असर डालती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर पूर्व में गंभीर आरोप लगे हों, तो उसकी पुनः पदस्थापना से पहले पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।

यह मामला सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है। वहीं, नागरिकों ने जिला प्रशासन रायपुर से भी इस विषय में हस्तक्षेप की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से निम्न मांगें सामने रखी गई हैं—

  1. पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

  2. वर्ष 2025 में दर्ज कथित अनियमितताओं से संबंधित फाइल एवं जांच प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।

  3. यदि किसी भी स्तर पर अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत पाई जाती है तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

  4. त्योहारों के दौरान अवैध शराब बिक्री पर विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक माना जा रहा है कि खरोरा देसी शराब दुकान से जुड़े इस पूरे विवाद का शीघ्र और निष्पक्ष समाधान हो, ताकि आम जनता का विश्वास शासन-प्रशासन पर बना रह सके।