पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, संपादक अजय ठाकरे के विरुद्ध झूठे प्रकरण की जांच की मांग

सिवनी में पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृहमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संपादक अजय ठाकरे के विरुद्ध दर्ज झूठे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की गई।

Oct 29, 2025 - 11:11
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पत्रकार संगठनों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, संपादक अजय ठाकरे के विरुद्ध झूठे प्रकरण की जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. आरिफ मोहम्मद, सिवनी। सिवनी जिले में कार्यरत विभिन्न पत्रकार संगठनों ने आज सामूहिक रूप से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय मोहन यादव एवं गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों पत्रकारों ने जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर यह ज्ञापन सौंपते हुए संपादक अजय ठाकरे के विरुद्ध दर्ज झूठे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि सिवनी जिले में पत्रकार निरंतर निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ जनता की आवाज प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। प्रदेश सरकार भी पत्रकारों के मान-सम्मान की बात करती है, लेकिन कई बार जमीनी स्तर पर पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है। कभी उन पर हमले किए जाते हैं, तो कभी बिना जांच के झूठे प्रकरण दर्ज कर उन्हें परेशान किया जाता है, जिससे लोकतंत्र की नींव कमजोर होती है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सिवनी कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 899/2025 में धारा 121(1), 132, 221, 296, 324(4), 351(3), 191(2) के तहत 08-10 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें दैनिक सिवनी न्यूज के संपादक अजय ठाकरे का नाम भी शामिल किया गया है। जबकि वे उस समय केवल समाचार कवरेज के उद्देश्य से मौके पर उपस्थित थे।

पत्रकार संगठनों ने कहा कि पुलिस द्वारा अजय ठाकरे के निवास पर जाकर गिरफ्तारी का प्रयास किया गया, जो न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है। उन्होंने मांग की कि प्रकरण की पहले निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच पूरी होने से पूर्व उनके परिवार को किसी भी प्रकार से परेशान न किया जाए।

ज्ञापन में आगे मांग की गई कि प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा हेतु विशेष कानून (Journalist Protection Law) बनाया जाए। किसी भी पत्रकार के विरुद्ध प्राप्त शिकायत पर राजपत्रित अधिकारी से निष्पक्ष जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाए।

पत्रकारों ने कहा कि यदि पत्रकारों को भीड़ या पक्ष विशेष का सदस्य मानकर बिना जांच के झूठे मामलों में फंसाया जाएगा, तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र दोनों के लिए घातक सिद्ध होगा।

ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक भोपाल, पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर एवं उप पुलिस महानिरीक्षक छिंदवाड़ा को भी प्रेषित की गई है, ताकि मामले पर उच्चस्तरीय समीक्षा कर न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।