जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अमित जोगी को आजीवन कारावास

छत्तीसगढ़ के चर्चित जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी है, जिससे 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया गया है।

Apr 6, 2026 - 13:09
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जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अमित जोगी को आजीवन कारावास

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे अदा नहीं करने पर छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाईकोर्ट ने 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत द्वारा दिए गए फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। उस समय ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि “एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराया जाना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना न्यायसंगत नहीं है।” अदालत ने इसे कानूनी रूप से असंगत और त्रुटिपूर्ण माना।

गौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था। इसके बाद हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें सभी साक्ष्यों और गवाहों का पुनः परीक्षण किया गया।

2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

जांच के दौरान बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। प्रारंभ में इस मामले में स्टे लगा, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट में पुनः सुनवाई के लिए भेज दिया।

हाईकोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

कौन थे रामावतार जग्गी

रामावतार जग्गी एक कारोबारी पृष्ठभूमि से जुड़े नेता थे और वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ पार्टी में चले गए। उन्हें छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

अन्य दोषी आरोपी

इस मामले में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, विक्रम शर्मा (मृत), जबवंत और विश्वनाथ राजभर सहित अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया था।

राजनीतिक और कानूनी असर

हाईकोर्ट के इस फैसले का प्रदेश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यह निर्णय न केवल एक लंबे समय से लंबित मामले में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्याय प्रक्रिया में देरी के बावजूद अंतिम फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही होता है।

यह फैसला आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल पैदा कर सकता है।