भारत ने चीन के दावे को किया खारिज, ऑपरेशन सिंदूर में भारत-पाकिस्तान सीजफायर द्विपक्षीय
भारत ने चीन के मध्यस्थता के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ सीजफायर दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
UNITED NEWS OF ASIA. ई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर चीन के दावे को भारत ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। भारत के अधिकारियों ने कहा कि यह संघर्षविराम दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधे बातचीत से तय हुआ था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि द्विपक्षीय मुद्दों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इससे पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया था कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान चीन ने मध्यस्थता की थी। वांग ने बीजिंग में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि चीन ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में न्यायसंगत रुख अपनाया और कई देशों में मध्यस्थता की। उन्होंने विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव, फिलिस्तीन-इजरायल और अन्य क्षेत्रीय संघर्षों का हवाला दिया।
हालांकि, भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी 19 सितंबर 2025 को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है और भारत इस रुख पर पहले भी स्पष्ट था और आगे भी रहेगा।
यह सीजफायर ऑपरेशन सिंदूर के चार दिन बाद लागू हुआ। ऑपरेशन 7 मई 2025 को लॉन्च किया गया था, जब पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादियों ने 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की टारगेट किलिंग की थी। इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने आतंकियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय कार्रवाई में सैकड़ों आतंकवादी मारे गए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने पलटवार किया, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के कई एयर डिफेंस सिस्टम और एयर स्ट्रिप को निष्क्रिय कर दिया।
इस द्विपक्षीय सीजफायर और ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य तैयारी और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया। भारत का रुख स्पष्ट है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में उसकी सैन्य और राजनीतिक रणनीति स्वतंत्र और द्विपक्षीय होगी, और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।