गौरतलब है कि एकता साहू पूर्व में दुर्ग विकासखंड के क्षेत्र सिरसा में पदस्थ थीं। 13 मार्च 2026 को उप संचालक कृषि द्वारा उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने 20 मार्च को अपील दायर की थी।
23 मार्च को हुई अपील की सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए। जांच में यह पाया गया कि विभागीय कार्यों में आई कुछ कमियों के पीछे केवल व्यक्तिगत लापरवाही ही नहीं, बल्कि कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं भी जिम्मेदार थीं।
अपने पक्ष में एकता साहू ने बताया कि उन्हें एक साथ कई महत्वपूर्ण विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसके चलते मक्का फसल प्रदर्शन की निरंतर निगरानी करना संभव नहीं हो पाया। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन पोर्टल एंट्री और “कृषि मेपर” ऐप के संचालन में पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव था, जिससे कार्य निष्पादन में कठिनाइयां आईं।
सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि विभागीय स्तर पर कार्यों का बोझ अधिक होने और तकनीकी संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण कई बार फील्ड अधिकारियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निलंबन आदेश पर पुनर्विचार किया।
संयुक्त संचालक कृषि द्वारा पारित आदेश में कहा गया कि अपील में प्रस्तुत तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निलंबन को समाप्त करते हुए अधिकारी को पुनः सेवा में बहाल किया जाता है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में कार्यों के प्रति अधिक जिम्मेदारी और सतर्कता अपेक्षित होगी।
इस निर्णय को विभागीय स्तर पर संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक ओर अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि जैसे क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है, ताकि वे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। इस मामले ने यह भी संकेत दिया है कि डिजिटल सिस्टम के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि विभाग भविष्य में कार्यप्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित करेगा तथा अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान करेगा, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके।
इस प्रकार, एकता साहू की बहाली न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार और संतुलन की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।