बम्लेश्वरी मंदिर में कथित बलि प्रकरण से बढ़ा विवाद, राज बैगा की गिरफ्तारी पर आदिवासी समाज में आक्रोश
डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में कथित मुर्गे की बलि और बैगा पद्धति से पूजा को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी और गोंड समाज में नाराज़गी बढ़ गई है। यह विवाद अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहकर परंपरा, अधिकार और प्रतिनिधित्व की लड़ाई बनता जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। ऊपरी पहाड़ी मंदिर में कथित रूप से मुर्गे की बलि और बैगा पद्धति से पूजा किए जाने के मामले ने वर्षों पुराने विवाद को फिर हवा दे दी है। मामले में राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी और गोंड समाज खुलकर विरोध में उतर आया है, जिससे क्षेत्र का माहौल गर्म हो गया है।
जानकारी के अनुसार 19 मई को मां बम्लेश्वरी के ऊपरी मंदिर परिसर में पुराने रोपवे के पास स्थित एक चट्टान को गढ़ माता मानकर बैगा परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई थी। इसी दौरान कथित तौर पर मुर्गे की बलि देने का आरोप लगा। घटना की जानकारी मिलने के बाद बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति ने इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने डोंगरगढ़ थाने में शिकायत देते हुए कहा कि इस घटना से मंदिर की पवित्रता भंग हुई है और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। ट्रस्ट का स्पष्ट कहना है कि मंदिर परिसर में केवल सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा की अनुमति है और किसी भी प्रकार की बलि प्रथा स्वीकार्य नहीं है।
मामले में डोंगरगढ़ एसडीओपी केसरी नंदन नायक ने बताया कि ट्रस्ट समिति की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई है। आरोपी किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
हालांकि गिरफ्तारी के बाद यह मामला केवल एक कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। आदिवासी और गोंड समाज ने इसे अपनी पारंपरिक आस्था और धार्मिक अधिकारों पर हमला बताया है। समाज के लोगों का कहना है कि मां बम्लेश्वरी धाम और आसपास के शक्तिपीठों में बैगा पद्धति से पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। उनका आरोप है कि अब इन्हीं परंपराओं को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है।
दरअसल डोंगरगढ़ में मंदिर ट्रस्ट और आदिवासी समाज के बीच विवाद कोई नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से मंदिर प्रबंधन, पूजा अधिकार और ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व को लेकर दोनों पक्षों के बीच खींचतान चलती रही है। आदिवासी समाज लंबे समय से मांग करता आ रहा है कि मंदिर ट्रस्ट में गोंड समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए और पारंपरिक बैगा व्यवस्था को सम्मान मिले।
नवरात्रि के दौरान गर्भगृह प्रवेश और पंचमी भेंट को लेकर भी पहले कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। उस दौरान भी आदिवासी संगठनों और ट्रस्ट समिति के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। कई बार आंदोलन और बंद की चेतावनी भी दी गई थी। आदिवासी समाज का आरोप रहा है कि मंदिर की मूल लोक परंपराओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है, जबकि ट्रस्ट धार्मिक मर्यादा और वैदिक व्यवस्था की बात करता रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह बहस भी लंबे समय से जारी है कि मां बम्लेश्वरी धाम की मूल परंपराएं क्या रही हैं और मंदिर व्यवस्था में किन समुदायों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। खैरागढ़ राजपरिवार का नाम भी समय-समय पर इस विवाद से जुड़ता रहा है।
अब किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद विवाद और गहरा गया है। सूत्रों के अनुसार आदिवासी समाज में भारी नाराज़गी है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। फिलहाल डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर शुरू हुआ यह मामला आस्था, परंपरा, अधिकार और धार्मिक नियंत्रण की बड़ी बहस में बदलता दिखाई दे रहा है।