दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास पर गंभीरता जरूरी: बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, पुनर्वास और अधिकारों पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दिव्यांग बच्चों के लिए समय पर स्क्रीनिंग, समावेशी शिक्षा, विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

Jul 5, 2026 - 11:06
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दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास पर गंभीरता जरूरी: बृजमोहन अग्रवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर स्थित विमतारा भवन में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा दिव्यांग बच्चों के विकास, शिक्षा, अधिकारों और पुनर्वास विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना, विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करना तथा समावेशी शिक्षा और बेहतर पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सुझाव साझा करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर सांसद एवं छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को सहानुभूति नहीं, बल्कि सहयोग, अवसर और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिव्यांग बच्चे में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है, जिसे पहचानकर आगे बढ़ाने की जरूरत है। समाज और शासन की जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने कहा कि बाल कल्याण परिषद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के दिव्यांग बच्चों को कम लागत में उपचार, प्रशिक्षण और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रही है। निजी अस्पतालों में महंगे उपचार के मुकाबले यहां बेहतर सेवाएं सुलभ दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने इस केंद्र को समाज और शासन से अधिक सहयोग मिलने की आवश्यकता भी बताई।

बृजमोहन अग्रवाल ने नवजात और छोटे बच्चों की समय पर स्क्रीनिंग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कई बार माता-पिता को वर्षों बाद बच्चों की दिव्यांगता की जानकारी मिलती है। यदि आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से दो वर्ष की आयु से पहले नियमित जांच सुनिश्चित की जाए तो समय रहते उपचार संभव हो सकता है। उन्होंने जिला अस्पतालों में आधुनिक स्क्रीनिंग उपकरण, प्रशिक्षित विशेषज्ञ, प्रभावी रेफरल प्रणाली और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए नीति में पर्याप्त प्रावधान हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत मिलने वाले संसाधनों का उचित उपयोग कर प्रत्येक विद्यालय में समावेशी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने और विशेष शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में परिषद के महासचिव चंद्रेश शाह ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और पुनर्वास को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना तथा विशेषज्ञों, अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों और योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

सेमिनार में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, डॉ. कमल वर्मा, डॉ. आलोक उपाध्याय, योगेंद्र पांडे, सज्जाद नकवी, सुगंधा जैन और डॉ. सारिका श्रीवास्तव सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने दिव्यांग बच्चों की समय पर पहचान, समावेशी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत बनाने पर अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, उचित उपचार और निरंतर पुनर्वास से दिव्यांग बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।