साय सरकार के तीसरे बजट में भी अनियमित कर्मचारियों को निराशा, मोदी की गारंटी से मुकरी सरकार – फेडरेशन का आरोप

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने साय सरकार के तीसरे बजट को अनियमित कर्मचारियों के लिए निराशाजनक बताया है। फेडरेशन का आरोप है कि आउटसोर्सिंग, ठेका, संविदा, दैनिक वेतनभोगी सहित विभिन्न श्रेणी के कर्मचारियों के लिए बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं की गई और मोदी की गारंटी 2023 के वादों से सरकार पीछे हट गई है।

Feb 25, 2026 - 17:29
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साय सरकार के तीसरे बजट में भी अनियमित कर्मचारियों को निराशा, मोदी की गारंटी से मुकरी सरकार – फेडरेशन का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के तीसरे बजट में भी प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिलने से व्यापक निराशा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने बजट को कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह उपेक्षापूर्ण बताया है।

फेडरेशन का कहना है कि आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह अथवा समिति के माध्यम से नियोजित कर्मचारी, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अंशकालिक कर्मचारी जैसे विभिन्न वर्गों के लिए बजट में किसी भी प्रकार की नई घोषणा नहीं की गई है। जबकि यही कर्मचारी वर्षों से प्रदेश के विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

फेडरेशन ने आरोप लगाया कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, तब पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने अनियमित कर्मचारियों के मंच पर आकर उनकी समस्याएं सुनी थीं और सरकार बनने पर शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया था। साथ ही ‘मोदी की गारंटी 2023’ के “वचनबद्ध सुशासन” के अंतर्गत एक समिति गठित कर उसमें अनियमित कर्मचारियों को शामिल करते हुए समीक्षा प्रक्रिया प्रारंभ करने की बात कही गई थी।

फेडरेशन का कहना है कि समिति गठन के आदेश में अनियमित कर्मचारियों का कहीं उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपने वादों से पीछे हट गई है। आरोप है कि बीते दो वर्षों में सरकार ने अनियमित कर्मचारियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

संघ ने यह भी कहा कि वादों के विपरीत कई विभागों में अनियमित कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। अनेक विभागों में वेतन लंबित है, संविदा दर के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है और न्यूनतम वेतन में पिछले आठ वर्षों से कोई वृद्धि नहीं हुई है। इसके अलावा कई विभागों में श्रम सम्मान राशि भी नहीं दी जा रही है।

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वे लगातार आवेदन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। साय सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं, परंतु लगातार अनदेखी से अनियमित कर्मचारी स्वयं को आहत और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

फेडरेशन ने यह भी कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नाम पर दी गई गारंटी के बावजूद छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

अंत में छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने अपने सहयोगी संगठनों और प्रदेशभर के अनियमित कर्मचारियों से लंबे और संगठित संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील की है।