धर्मजयगढ़ में फिर हाथी शावक की मौत, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन मंडल में एक और हाथी शावक की मौत का मामला सामने आया है। लगातार हो रही हाथियों और शावकों की मौत के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

May 24, 2026 - 13:35
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धर्मजयगढ़ में फिर हाथी शावक की मौत, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA.  महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन मंडल में एक बार फिर हाथी शावक की मौत का मामला सामने आने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में लगातार हाथियों और शावकों की रहस्यमयी मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। ताजा घटना के बाद स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार बीते कुछ दिनों के भीतर हाथी शावक की मौत का यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और जंगलों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि हर घटना के बाद विभाग जांच की बात करता है, लेकिन अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस स्थान पर हाथी शावक का शव मिला है, वह कोई प्राकृतिक तालाब या डबरी नहीं थी, बल्कि रेलवे लाइन निर्माण के दौरान खोदा गया गड्ढा था। आरोप है कि निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार द्वारा परिवहन लागत बचाने के लिए आसपास की मिट्टी निकालकर गड्ढा छोड़ दिया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी गड्ढे में फंसने या किसी अन्य कारण से शावक की मौत हुई होगी।

इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार हर वर्ष जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार हाथियों की मौत से यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त गंभीर है।

क्षेत्र के लोगों ने आरोप लगाया कि जंगलों में नियमित निगरानी और गश्त की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते खतरनाक गड्ढों और अन्य जोखिम वाले स्थानों को चिन्हित कर सुरक्षा व्यवस्था की जाती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जैसे बड़े वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर और प्राकृतिक आवास बेहद जरूरी हैं। जंगल क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने से वन्यजीवों के सामने खतरे बढ़ जाते हैं। रेलवे लाइन, सड़क निर्माण और खनन गतिविधियों के कारण हाथियों के पारंपरिक रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं और मौतों की घटनाएं बढ़ रही हैं।

मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने वन विभाग से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हाथियों की मौत का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

फिलहाल वन विभाग द्वारा मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि विभाग केवल औपचारिक जांच तक सीमित रहता है या वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम भी उठाए जाते हैं।