धमतरी में पॉक्सो एक्ट मामले में बड़ा फैसला: आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा

धमतरी में पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने आरोपी अनिल यादव को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मजबूत साक्ष्य और पुलिस की प्रभावी विवेचना के चलते यह फैसला आया।

Apr 3, 2026 - 18:57
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धमतरी में पॉक्सो एक्ट मामले में बड़ा फैसला: आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पॉक्सो  एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपी अनिल यादव को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

यह मामला थाना सिटी कोतवाली धमतरी में अपराध क्रमांक 46/25 के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 137(2), 65(1) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था। यह मामला नाबालिग के साथ दुष्कर्म से जुड़ा एक संवेदनशील और गंभीर अपराध था।

प्रकरण में आरोपी अनिल यादव (उम्र 32 वर्ष), निवासी बनिया पारा, धमतरी के खिलाफ पुलिस द्वारा मजबूत साक्ष्य जुटाए गए। न्यायालय में प्रस्तुत किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को दोषसिद्ध पाया गया।

इस मामले की विवेचना थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक राजेश मरई और तत्कालीन विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक संतोषी नेताम द्वारा अत्यंत गंभीरता और पेशेवर दक्षता के साथ की गई। उन्होंने साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन किया और सभी आवश्यक तथ्यों को सुदृढ़ रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

पुलिस की इसी सशक्त और प्रभावी विवेचना के कारण आरोपी को कड़ी सजा दिलाने में सफलता मिली। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए धमतरी पुलिस अधीक्षक द्वारा विवेचना अधिकारी को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित करने की घोषणा की गई है।

धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में “शून्य सहनशीलता” (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सजा मिलना समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है और अपराधियों में भय उत्पन्न करता है। साथ ही यह पीड़ित और उनके परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होता है।

गौरतलब है कि देशभर में महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में तेजी से सुनवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं। पॉक्सो एक्ट भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देना है।

इस फैसले के बाद धमतरी पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि हर पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाएगा।

इस प्रकार, धमतरी में आया यह न्यायालय का फैसला न केवल एक आरोपी को सजा देने तक सीमित है, बल्कि यह समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करने वाला भी साबित हुआ है।