स्कूल-कॉलेजों में फीस वृद्धि पर कांग्रेस का विरोध, गरीब छात्रों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का लगाया आरोप

प्रदेश कांग्रेस ने सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फीस बढ़ोतरी का विरोध करते हुए इसे गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। कांग्रेस ने सरकार से शुल्क वृद्धि का निर्णय वापस लेने और शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाए रखने की मांग की है।

Jul 26, 2026 - 13:03
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स्कूल-कॉलेजों में फीस वृद्धि पर कांग्रेस का विरोध, गरीब छात्रों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का लगाया आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शुल्क वृद्धि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की फीस बढ़ाए जाने का विरोध करते हुए राज्य सरकार पर छात्रों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था को महंगा बनाना गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए चिंता का विषय है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में फीस बढ़ाने का निर्णय लाखों विद्यार्थियों के हितों के विपरीत है। उनका कहना है कि बढ़ती शिक्षा लागत के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और अधिक कठिन हो सकता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को जनहित के बजाय राजस्व का माध्यम बना रही है।

कांग्रेस ने दावा किया कि रविशंकर विश्वविद्यालय में परीक्षा और नामांकन शुल्क में लगभग 46 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। साथ ही प्रत्येक वर्ष पांच प्रतिशत शुल्क बढ़ाने का निर्णय भी छात्रों के हितों के खिलाफ बताया गया। पार्टी का कहना है कि पहले से ही निजी शिक्षण संस्थानों की फीस को लेकर अभिभावकों पर दबाव बना हुआ है, ऐसे में सरकारी संस्थानों में भी शुल्क वृद्धि छात्रों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकती है।

प्रेस विज्ञप्ति में माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा फीस में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया। कांग्रेस के अनुसार, कक्षा 10वीं और 12वीं की नियमित परीक्षा फीस, मार्कशीट शुल्क तथा प्रायोगिक परीक्षा शुल्क में वृद्धि से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा है। इसके अलावा ट्यूशन, विकास शुल्क और विभिन्न गतिविधियों से जुड़े शुल्क बढ़ने का भी आरोप लगाया गया है।

कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा सभी वर्गों के लिए समान रूप से सुलभ होनी चाहिए और शुल्क निर्धारण से पहले छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त परामर्श के लिए गए ऐसे निर्णय शिक्षा व्यवस्था में असंतोष पैदा कर सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बढ़ाई गई फीस की समीक्षा की जाए और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए शुल्क वृद्धि का निर्णय वापस लिया जाए। पार्टी का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और संतुलित शुल्क नीति आवश्यक है, ताकि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई आर्थिक कारणों से प्रभावित न हो। पार्टी ने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही शुल्क वृद्धि से जुड़े निर्णयों पर पुनर्विचार कर विद्यार्थियों को राहत प्रदान की जाए।