ईपीएफओ नियमों में बदलाव पर कांग्रेस का हमला, कर्मचारियों के भविष्य निधि पर असर का दावा

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ईपीएफओ से जुड़े नए नियमों को कर्मचारी विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस का दावा है कि नए प्रावधानों से कर्मचारियों के भविष्य निधि और रिटायरमेंट फंड पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। हालांकि, यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित नियमों पर केंद्र सरकार का आधिकारिक पक्ष इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।

Jul 5, 2026 - 11:33
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ईपीएफओ नियमों में बदलाव पर कांग्रेस का हमला, कर्मचारियों के भविष्य निधि पर असर का दावा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े नए नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि नए प्रावधान कर्मचारियों के दीर्घकालिक हितों के विपरीत हैं और इससे भविष्य निधि में जमा होने वाली राशि पर असर पड़ सकता है। यह बयान कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दिया गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि नए नियमों के तहत कर्मचारियों को अधिक टेक-होम सैलरी का प्रलोभन देकर उनके भविष्य की सामाजिक सुरक्षा को कमजोर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इन बदलावों से निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है, जबकि कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस का दावा है कि पहले कर्मचारी के मूल वेतन के आधार पर भविष्य निधि में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान निर्धारित होता था। पार्टी का कहना है कि नए नियमों में नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान की सीमा वैधानिक वेतन सीमा के आधार पर तय कर दी गई है, जिससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के पीएफ खाते में पहले की तुलना में कम राशि जमा हो सकती है। कांग्रेस के अनुसार, इससे भविष्य में मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट फंड प्रभावित हो सकता है।

सुरेंद्र वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि पहले कर्मचारी अपनी आवश्यकता के अनुसार अधिक पीएफ कटौती का विकल्प चुन सकते थे, लेकिन अब इस प्रक्रिया में कंपनियों की भूमिका बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों के अधिकार सीमित हो सकते हैं और भविष्य निधि में जमा होने वाली राशि घटने की आशंका है।

कांग्रेस ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी का मासिक वेतन 50 हजार रुपये है, तो पहले उसके वेतन के अनुपात में भविष्य निधि में अधिक राशि जमा होती थी। पार्टी का दावा है कि नए प्रावधानों के बाद नियोक्ता के अनिवार्य योगदान की सीमा कम होने से कर्मचारियों को भविष्य में मिलने वाले पीएफ और उस पर मिलने वाले ब्याज का भी नुकसान हो सकता है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार से इन नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उपरोक्त सभी आरोप और दावे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। इस विषय पर केंद्र सरकार या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।