मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हनुमान जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी बल, बुद्धि और विद्या के प्रतीक हैं और उनका जीवन हमें निष्ठा, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने पवित्र नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत भूमिपूजन भी किया। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर महंत दयाल दास जी के चिमटे से मां नर्मदा का प्राकट्य हुआ था, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। भूमिपूजन के साथ ही मंदिर परिसर के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और हनुमान जी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर 01 से 05 अप्रैल तक आयोजित श्री राम कथा में स्वामी राजीव लोचन दास द्वारा प्रवचन भी किए जा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को भगवान श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका माना जाता है। रामायण काल में वर्णित दंडकारण्य क्षेत्र का अधिकांश भाग आज के छत्तीसगढ़ में स्थित है, जिससे प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान और मजबूत होती है।
उन्होंने सरकार की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक लगभग 42 हजार श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर चुके हैं, जबकि 5 हजार से अधिक बुजुर्ग विभिन्न तीर्थस्थलों की यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा तीर्थयात्रा के लिए 19 स्थलों का चयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े प्रावधानों के साथ धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया है, जिससे इस प्रकार की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। साथ ही गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए सुरभि गौधाम योजना के तहत प्रदेश में 330 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 29 गौधाम शुरू किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्र सेना और रुद्र शक्ति के पोस्टर का विमोचन भी किया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का एक भव्य उदाहरण बना, जिसमें मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।