सीएनआई के सचिव नितिन लारेन्स ने बयान जारी कर कहा कि चर्च की प्रशासनिक और धार्मिक संरचना पूरी तरह संवैधानिक एवं निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत संचालित होती है। किसी भी व्यक्ति को चर्च या समुदाय का अध्यक्ष अथवा प्रतिनिधि घोषित करने के लिए विधिवत प्रक्रिया और अधिकृत नियुक्ति आवश्यक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पन्नालाल को मसीही समाज अथवा सीएनआई की ओर से किसी प्रकार की अधिकृत मान्यता प्राप्त नहीं है।
इस विवाद के बीच CNI Synod, नई दिल्ली के जनरल सेक्रेटरी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र का भी उल्लेख किया गया है। इस पत्र में छत्तीसगढ़ से जुड़े कुछ सार्वजनिक दावों को तथ्यहीन बताया गया है और कहा गया है कि डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ से संबंधित जो बातें प्रसारित की जा रही हैं, उनका चर्च की आधिकारिक संरचना से कोई संबंध नहीं है।
Diocese of Chhattisgarh ने आरोप लगाया है कि “छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम” नामक संस्था के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर YouTube चैनल पर बयानबाजी की जा रही है। इन गतिविधियों के जरिए समाज में भ्रम फैलने और संभावित सामाजिक तनाव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।
डायोसिस ने यह भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है कि क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल फंड संग्रह किया जा रहा है, जिसकी वैधता और उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। चर्च नेतृत्व का कहना है कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य उत्पन्न हो, चर्च की शिक्षाओं और मूल्यों के विरुद्ध है।
डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने इस पूरे मामले को लेकर रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपे जाने की पुष्टि की है। शिकायत में सोशल मीडिया गतिविधियों, डिजिटल लेन-देन, सार्वजनिक दावों तथा संबंधित बयानों की निष्पक्ष जांच कराने, आवश्यकता होने पर संबंधित चैनल को प्रतिबंधित करने और विधि अनुसार अपराध दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
चर्च की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि धर्म के नाम पर किसी प्रकार की विभाजनकारी या राजनीतिक गतिविधि में कोई व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले को और गंभीर बनाते हुए डायोसिस ने एक वीडियो का उल्लेख किया है, जिसमें श्री अरुण पन्नालाल द्वारा यह दावा किया गया है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को पत्र लिखकर भारत में प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था और कथित रूप से कोई प्रतिनिधि आया भी था। डायोसिस ने इन दावों को पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताया है।
अंत में, सीएनआई और डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि मसीही समाज के नाम पर दिए जा रहे किसी भी बयान को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले चर्च की अधिकृत संरचना से सत्यापन अवश्य किया जाए। साथ ही सभी समुदायों से शांति, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील भी की गई है।