छत्तीसगढ़ में यूसीसी को लेकर सियासत तेज, दीपक बैज ने आदिवासी अधिकारों पर खतरा बताया

छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू करने को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे आदिवासी हितों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए सरकार से कई सवाल उठाए हैं।

Apr 16, 2026 - 17:00
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छत्तीसगढ़ में यूसीसी को लेकर सियासत तेज, दीपक बैज ने आदिवासी अधिकारों पर खतरा बताया

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l  छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। साय मंत्रिमंडल द्वारा यूसीसी लागू करने के लिए कमेटी गठन के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे आदिवासियों के हितों और अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है।

दीपक बैज ने अपने बयान में कहा कि यदि छत्तीसगढ़ में यूसीसी लागू किया जाता है, तो इसका सबसे अधिक नुकसान राज्य के आदिवासी समुदाय को होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को विशेष संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें अन्य वर्गों से अलग बनाता है। राज्य की लगभग 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी है, जिनके अधिकारों की रक्षा के लिए पेसा कानून और संविधान की पांचवी अनुसूची लागू है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यूसीसी के माध्यम से इन विशेष अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। बैज ने कहा कि यह कदम आदिवासी समाज के खिलाफ है और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने की साजिश है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने की घोषणा के बाद से ही कुछ उद्योगपतियों की नजर आदिवासियों की जमीनों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित उद्योगपति आदिवासी क्षेत्रों में जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं और यूसीसी इसी दिशा में एक कदम हो सकता है।

उन्होंने सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे। बैज ने पूछा कि क्या यूसीसी लागू होने के बाद पेसा कानून का अस्तित्व बना रहेगा? क्या पांचवी अनुसूची के तहत मिलने वाले पंचायतों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राज्य की संरक्षित जनजातियां जैसे बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया और पांडा को मिले विशेष संवैधानिक संरक्षण पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आदिवासियों के सामुदायिक भूमि अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा। बैज ने स्पष्ट कहा कि आदिवासियों की जमीनों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अधिकारों में कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश का नेतृत्व एक आदिवासी मुख्यमंत्री के हाथों में होने के बावजूद यदि ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, तो यह चिंताजनक है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों के अधिकारों के साथ कोई छेड़छाड़ की जाती है, तो पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता बरतने और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील की है।

यूसीसी को लेकर छत्तीसगढ़ में यह विवाद आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।