पैथोलॉजी सेवाओं के ठेके पर कांग्रेस का हमला, सुरेंद्र वर्मा ने बताया ‘भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल’
छत्तीसगढ़ में अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को ठेके पर दिए जाने को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने इसे भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल बताते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद गहराता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को ठेके पर देने के फैसले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने इस व्यवस्था को “भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल” करार दिया है।
सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के पैथोलॉजी सेवाओं का ठेका एक सरकारी कंपनी को दिया गया, जिसने आगे इसे निजी कंपनी को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और यह कमीशनखोरी को बढ़ावा देने का एक माध्यम बन गया है।
उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था में प्रयोग होने वाली मशीनें, लैब की जगह और तकनीकी स्टाफ सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि जांच का कार्य ठेका कंपनी करेगी। इतना ही नहीं, जांच की फीस का भुगतान भी सरकार द्वारा ही किया जाएगा। ऐसे में ठेका कंपनी की भूमिका केवल बिलिंग तक सीमित रह जाती है, जिससे इस व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है और लगातार नए-नए तरीके अपनाकर अनियमितताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सुरेंद्र वर्मा ने यह भी कहा कि प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मरीजों को नकली, अमानक और गुणवत्ताहीन दवाएं वितरित की जा रही हैं। कई मामलों में दवाओं में फंगस पाए जाने और एंटीबायोटिक दवाओं से एलर्जी होने की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि डायरिया से पीड़ित मरीजों को दी गई दवाओं में भी गड़बड़ी पाई गई, वहीं बच्चों को दी जाने वाली कृमि नाशक दवाएं भी मानक के अनुरूप नहीं थीं। गर्भवती महिलाओं को वितरित की गई आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां भी गुणवत्ताहीन पाई गईं। इसके अलावा, ग्लूकोज की बोतलों में फफूंद मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे मरीजों की स्थिति और बिगड़ रही है।
कांग्रेस ने इन सभी मामलों की गंभीर जांच की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को पैथोलॉजी सेवाओं के ठेके को तत्काल निरस्त कर अस्पतालों में इन सेवाओं का संचालन स्वयं करना चाहिए।
अंत में सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी होती हैं और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।
यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस को जन्म देता है, जो आने वाले समय में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है।