मृतक की पहचान लीवन भुआर्य (उम्र 35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो ग्राम हथौद (सुरेगांव) का निवासी था और पुलिस लाइन बालोद में पदस्थ था। जानकारी के अनुसार, वह करीब चार महीने पहले ही जिला अस्पताल के सामने स्थित पुलिस कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहने आया था।
घटना के समय कांस्टेबल की पत्नी और बच्चे एक शादी समारोह में गए हुए थे, जबकि वह घर पर अकेला था। गुरुवार सुबह नाइट ड्यूटी से लौटने के बाद वह अपने क्वार्टर में था। कुछ समय बाद जब उसकी पत्नी ने फोन किया और उसने कॉल रिसीव नहीं किया, तो उसे चिंता हुई। इसके बाद पत्नी ने पड़ोसियों को इस बारे में सूचना दी।
पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद आसपास खेल रहे बच्चों को आवाज लगाने के लिए भेजा गया। काफी देर तक प्रयास करने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो बच्चों ने दरवाजे में बने छेद से अंदर झांककर देखा। अंदर का दृश्य देखकर वे घबरा गए, क्योंकि कांस्टेबल फांसी के फंदे पर लटका हुआ था।
घटना की जानकारी मिलते ही बालोद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को जिला अस्पताल के मर्च्युरी में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा के अनुसार, कांस्टेबल ने अपने क्वार्टर में पलंग के सहारे पंखे से स्कार्फ के जरिए फांसी लगाई थी। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कांस्टेबल के परिजनों व सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के पीछे की वजह सामने आ सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस जैसे जिम्मेदार और दबाव वाले पेशे में कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। लगातार ड्यूटी, तनाव और व्यक्तिगत कारण कई बार ऐसी दुखद घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।
फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है और जल्द ही मामले के पीछे की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।