छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिली मदद, हरमनिया देवी के सपनों को मिली नई उड़ान

सरगुजा जिले के मेंड्राकला की हरमनिया देवी राजवाड़े ने छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से किराना और सिंगार सामग्री का व्यवसाय शुरू किया। आकांक्षा स्व-सहायता समूह के माध्यम से शुरू हुआ यह कारोबार अब समूह की महिलाओं के लिए नियमित आय और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है।

Sep 2, 2026 - 20:30
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छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिली मदद, हरमनिया देवी के सपनों को मिली नई उड़ान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी हरमनिया देवी राजवाड़े ने मेहनत, सामूहिक प्रयास और आर्थिक सहयोग के जरिए आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। कभी सीमित साधनों के कारण आजीविका के लिए कठिनाइयों का सामना करने वाली हरमनिया देवी आज आकांक्षा स्व-सहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर किराना और सिंगार सामग्री का व्यवसाय संचालित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने समूह को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक आर्थिक आधार उपलब्ध कराया, जिसके बाद महिलाओं ने स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना व्यवसाय शुरू किया।

आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हरमनिया देवी के अनुसार, समूह से जुड़ी महिलाओं के सामने ऐसी आजीविका गतिविधि शुरू करने की चुनौती थी, जिससे उन्हें नियमित आमदनी प्राप्त हो सके। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण सहायता मिलने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं से चर्चा की और योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन किया। ऋण स्वीकृत होने के बाद समूह ने प्राप्त राशि का उपयोग व्यवसाय शुरू करने में करने का सामूहिक निर्णय लिया।

एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता से समूह ने ग्रामीण क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराना और सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। दुकान में रोजमर्रा की जरूरत का सामान उपलब्ध होने के साथ महिलाओं की आवश्यकता से जुड़ी सिंगार सामग्री भी रखी गई। एक ही स्थान पर अलग-अलग जरूरी वस्तुएं मिलने से स्थानीय लोगों को सुविधा हुई और धीरे-धीरे दुकान को ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिलने लगा। इससे समूह की महिलाओं के लिए नियमित आय का एक नया माध्यम तैयार हुआ।

हरमनिया देवी बताती हैं कि महिला कोष से मिली सहायता केवल व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे समूह की महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं मिलकर दुकान का संचालन करती हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। सामूहिक रूप से काम करने के कारण महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता, जिम्मेदारी निभाने की भावना और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी भी मजबूत हुई है।

व्यवसाय से होने वाली आय का सकारात्मक असर समूह की महिलाओं के पारिवारिक जीवन पर भी देखने को मिल रहा है। आय में सुधार होने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू आवश्यकताओं और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में पहले की तुलना में सुविधा हुई है। हरमनिया देवी के अनुसार, पहले आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब नियमित आय का साधन उपलब्ध होने से परिवार की आवश्यकताओं को संभालना आसान हुआ है।

हरमनिया देवी के लिए छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिला ऋण आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता का अवसर बना है। उनका कहना है कि एक लाख रुपये की सहायता से शुरू हुई दुकान आज समूह की महिलाओं की आजीविका का आधार बन रही है और इससे उन्हें अपने परिवार को बेहतर ढंग से संभालने का भरोसा मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने वाली योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।