औपचारिक नाम से अपनत्व तक, छत्तीसगढ़ के बाल गृहों की बदलेगी पहचान, 21 सितंबर तक मांगी गई रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के बाल एवं बालिका संरक्षण गृह और बाल संप्रेक्षण गृहों को नई, सकारात्मक और बालहितैषी पहचान देने की पहल की है। आयोग ने स्थानीय भाषा, संस्कृति, प्रकृति और लोक परंपराओं से जुड़े नाम अपनाने का सुझाव दिया है। जिलों से प्रस्तावित नामों और कार्रवाई की रिपोर्ट 21 सितंबर 2026 तक मांगी गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l 2 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश में संचालित बाल एवं बालिका संरक्षण गृह तथा बाल संप्रेक्षण गृहों को नई और सकारात्मक पहचान देने की दिशा में पहल शुरू की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल पर महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र भेजकर इन संस्थाओं के वर्तमान औपचारिक और संस्थागत नामों के स्थान पर ऐसे नाम रखने का आग्रह किया गया है, जो बच्चों के मन में अपनत्व, आत्मसम्मान और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक हों। आयोग का मानना है कि किसी भी संस्था का नाम केवल उसकी प्रशासनिक पहचान नहीं होता, बल्कि उससे जुड़े लोगों के मनोभाव और सामाजिक धारणा पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है।