खमतराई काली मां मंदिर में हलषष्ठी पर विधिवत पूजा-अर्चना, सगरी माता और भगवान बलदाऊ जी का लिया आशीर्वाद

रायपुर के खमतराई स्थित काली मां मंदिर में हलषष्ठी यानी कमरछठ के पावन अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सगरी माता और भगवान बलदाऊ जी की पूजा कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।

Sep 2, 2026 - 17:41
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खमतराई काली मां मंदिर में हलषष्ठी पर विधिवत पूजा-अर्चना, सगरी माता और भगवान बलदाऊ जी का लिया आशीर्वाद

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l खमतराई स्थित काली मां मंदिर में आज हलषष्ठी यानी कमरछठ के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण पर्व पर सगरी माता और भगवान बलदाऊ जी का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा कर परिवार एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

हलषष्ठी का पर्व छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में विशेष धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। विशेष रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कामना को लेकर इस दिन व्रत और पूजा करती हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सगरी बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। भगवान बलदाऊ जी को भी इस पर्व से विशेष रूप से जोड़ा जाता है और श्रद्धालु उनकी आराधना कर परिवार के लिए मंगलकामना करते हैं।

खमतराई के काली मां मंदिर में भी हलषष्ठी के अवसर पर धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की गई। सगरी माता की पूजा के साथ भगवान बलदाऊ जी का स्मरण किया गया और सभी के जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना की गई। पूजा के दौरान श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर प्रदेशवासियों के लिए विशेष मंगलकामना करते हुए कामना की गई कि कमरछठ का यह पावन पर्व हर परिवार के जीवन में खुशियां लेकर आए।

हलषष्ठी पर्व का सामाजिक और पारिवारिक महत्व भी काफी व्यापक है। यह पर्व मातृत्व की भावना, संतान के प्रति प्रेम और परिवार की खुशहाली से जुड़ा हुआ माना जाता है। परंपराओं के अनुसार महिलाएं इस दिन विशेष नियमों का पालन करते हुए पूजा करती हैं और भगवान से अपनी संतान की रक्षा तथा उनके सुखद भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। वहीं सगरी माता और भगवान बलदाऊ जी की पूजा के माध्यम से प्रकृति, कृषि परंपरा और लोक आस्था के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया जाता है।

रायपुर में आयोजित इस पूजा के अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए मंगलकामना की गई। प्रार्थना की गई कि हलषष्ठी का यह पावन पर्व सभी प्रदेशवासियों के जीवन में शांति, सौहार्द और समृद्धि लेकर आए। परिवारों में खुशियां बनी रहें और समाज में आपसी भाईचारा तथा सद्भाव मजबूत हो। कमरछठ की धार्मिक आस्था और छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़ा यह पर्व लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी संदेश देता है।