कबीरधाम में प्लास्टिक अपशिष्ट से बनेंगे उपयोगी संसाधन, चार विकासखंडों में शुरू हुई प्रबंधन यूनिट

कबीरधाम जिले में प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए चारों विकासखंडों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट स्थापित की गई हैं। जिला पंचायत ने सभी ग्राम पंचायतों को प्लास्टिक कचरा इन यूनिटों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

Jul 23, 2026 - 15:51
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कबीरधाम में प्लास्टिक अपशिष्ट से बनेंगे उपयोगी संसाधन, चार विकासखंडों में शुरू हुई प्रबंधन यूनिट

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कबीरधाम जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में जिला पंचायत ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिले के चारों विकासखंड—कवर्धा, बोड़ला, पंडरिया और सहसपुर लोहारा—में अत्याधुनिक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट स्थापित की गई हैं। इन यूनिटों के माध्यम से प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उसे दोबारा उपयोगी संसाधनों में बदला जाएगा।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने सभी ग्राम पंचायतों, स्वच्छाग्रहियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घर-घर से एकत्रित किए जाने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक और अन्य प्लास्टिक अपशिष्ट को खुले में फेंकने या जलाने के बजाय संबंधित जनपद पंचायत स्तर पर स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरा केवल अपशिष्ट नहीं, बल्कि एक मूल्यवान संसाधन है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण और प्रसंस्करण किया जाए तो इससे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी।

अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक प्रबंधन यूनिट में आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। इनमें बेलन मशीन प्लास्टिक को दबाकर गठ्ठों में बदलने का कार्य करेगी। श्रेडर मशीन प्लास्टिक की सफाई और प्राथमिक प्रसंस्करण करेगी, जबकि फटका मशीन प्लास्टिक को छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलकर रीसाइक्लिंग के लिए तैयार करेगी। इस प्रक्रिया से प्लास्टिक का सुरक्षित और प्रभावी पुनर्चक्रण संभव होगा।

उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है कि अपने क्षेत्र में उत्पन्न प्लास्टिक अपशिष्ट का खुले में निस्तारण न होने दे। सभी पंचायतों को व्यवस्थित रूप से प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर निकटतम प्रबंधन यूनिट तक पहुंचाना होगा। इससे प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण का निर्माण किया जा सकेगा।

जिला पंचायत का मानना है कि इस परियोजना से केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्लास्टिक के संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों और स्वच्छाग्रहियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

अभिषेक अग्रवाल ने स्वच्छाग्रहियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और निरंतर प्रयासों से जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत हो रही है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों और नागरिकों से अपील की कि वे प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण में सहयोग करें और स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन बनाएं।

जिला पंचायत को उम्मीद है कि जनसहभागिता और आधुनिक तकनीक के समन्वय से कबीरधाम को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के साथ-साथ "स्वच्छ कबीरधाम, स्वस्थ कबीरधाम" के लक्ष्य को भी जल्द साकार किया जा सकेगा।