इस अवसर पर सर्वजन हिताय और मानव सेवा की भावना को केंद्र में रखते हुए, फोर्टिस ओ.पी. जिंदल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, रायगढ़ के सहयोग से एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्लांट के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी ने स्वेच्छा से रक्तदान कर माता श्री की स्मृति में सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। सायं 5:00 बजे तक कुल 110 यूनिट रक्त संग्रह किया गया, जो इस आयोजन की सफलता और सहभागिता का सशक्त प्रमाण रहा। यह आयोजन वास्तव में “परहित सरिस धर्म नहि भाई” की भावना को चरितार्थ करता हुआ एक अनुकरणीय प्रयास सिद्ध हुआ।
प्लांट प्रबंधन की ओर से बताया गया कि रक्तदान शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायी रक्त उपलब्ध कराना तथा कर्मचारियों में सामाजिक चेतना और सेवा भाव को प्रोत्साहित करना है। इस पुनीत कार्य में चिकित्सा टीम द्वारा पूर्ण समर्पण के साथ सेवाएं दी गईं तथा सभी रक्तदाताओं का विधिवत स्वास्थ्य परीक्षण कर सुरक्षित रूप से रक्त संग्रह किया गया।
इसके साथ ही कार्यक्रम के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष को सुदृढ़ करते हुए प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक प्लांट परिसर स्थित हनुमान मंदिर में उमाशंकर मिश्रा एवं उनकी टीम द्वारा सुंदरकांड का भावपूर्ण और मधुर पाठ किया गया। सुंदरकांड पाठ के दौरान संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं और कर्मचारियों ने पाठ का श्रवण कर आत्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।
सुंदरकांड पाठ के पश्चात मातृस्मृति में आयोजित भव्य भंडारे में सभी आगंतुकों, कर्मचारियों एवं अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया और माता के प्रति श्रद्धा अर्पित की। आयोजन स्थल पर अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्था की विशेष सराहना की गई।
इस अवसर पर पवन अग्रवाल ने कहा कि उनकी माता जी का जीवन सादगी, करुणा और सेवा भाव का प्रतीक रहा है। उन्हीं मूल्यों से प्रेरित होकर प्रत्येक वर्ष इस प्रकार के सामाजिक और मानवीय सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और अधिक सशक्त रूप से निभाया जा सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले समस्त कर्मचारियों, चिकित्सा दल एवं सहयोगियों के प्रति प्लांट प्रबंधन द्वारा हृदय से आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन न केवल एक पुण्य स्मृति कार्यक्रम रहा, बल्कि सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदना का प्रेरक उदाहरण भी बना।