अशासकीय विद्यालय संचालकों की मांग तेज, RTE भुगतान से लेकर मान्यता प्रक्रिया में सुधार की उठी आवाज
छत्तीसगढ़ के अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने RTE भुगतान, मान्यता प्रक्रिया और शैक्षणिक सुधारों सहित कई मांगों को लेकर शासन से जल्द समाधान की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ में अशासकीय विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं को लेकर संचालकों की आवाज एक बार फिर मुखर होती नजर आ रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय संगठनों ने मिलकर वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन किया था, जिसका उद्देश्य निजी विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखना है।
पिछले 8-9 वर्षों से यह संगठन जिला स्तर पर अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता रहा है। अब प्रदेश स्तरीय संगठन बनने के बाद यह मुद्दे और अधिक संगठित रूप से उठाए जा रहे हैं।
संघ की प्रमुख मांगों में सबसे अहम मुद्दा शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का है। संचालकों का कहना है कि यह राशि सत्र समाप्त होते ही पूर्ण रूप से और समय पर दी जानी चाहिए। साथ ही प्राथमिक, माध्यमिक और हाईस्कूल स्तर पर प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की भी मांग की गई है।
इसके अलावा RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग की गई है। संघ का कहना है कि प्रवेश केवल पूर्व वर्ष की दर्ज संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि विद्यालय की कुल सीट क्षमता के 25 प्रतिशत के अनुसार होना चाहिए। साथ ही यूनिफॉर्म के लिए दी जाने वाली राशि बढ़ाने और छात्रों को सरस्वती साइकिल योजना का लाभ देने की भी मांग की गई है।
शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए संघ ने 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल करने का प्रावधान लागू करने की बात कही है। वहीं शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर को समय पर जारी करने और पूरे वर्ष उसी के अनुसार संचालित करने की भी आवश्यकता जताई गई है।
संघ ने पाठ्यपुस्तकों की समय पर उपलब्धता और मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मान्यता एक साथ पांच वर्षों के लिए दी जानी चाहिए, ताकि विद्यालयों को बार-बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े।
इसके साथ ही निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी सरकारी शिक्षकों की तरह प्रशिक्षण देने और डी.एड व बी.एड पाठ्यक्रम को दूरस्थ माध्यम से उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है।
संघ ने कुछ कॉरपोरेट स्कूल समूहों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये समूह निजी विद्यालयों की छवि खराब करने के लिए भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं और RTE जैसी योजनाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
संघ ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के अधिकांश अशासकीय विद्यालय शासन के सभी नियमों का पालन करते हैं और शिक्षा को सेवा के रूप में संचालित करते हैं, न कि व्यवसाय के रूप में।
संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से कई बार मुलाकात कर चुके हैं और सकारात्मक चर्चा भी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन मांगों पर ठोस निर्णय लेगी।
कुल मिलाकर, अशासकीय विद्यालय संचालकों की यह पहल शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।