बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में सदस्यता शुल्क और कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल
बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली, सदस्यता शुल्क वसूली, बायलाज के पालन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समाज के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि नियमावली को दरकिनार कर 18 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों और महिलाओं से सदस्यता शुल्क लिया जा रहा है तथा जानकारी मांगने वालों को समाज विरोधी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली और सदस्यता शुल्क व्यवस्था को लेकर समाज के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रेस के माध्यम से जारी बयान में समाज के पदाधिकारियों पर बायलाज (नियमावली) की अनदेखी करने तथा मनमाने तरीके से निर्णय लेने के आरोप लगाए गए हैं।
आरोपों के अनुसार समाज में ऐसे व्यक्तियों को भी बहिष्कृत घोषित करने की कोशिश की जा रही है जो समाज के सदस्य ही नहीं हैं। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक पुरुष और महिला सदस्य से 50 रुपये सदस्यता शुल्क वसूले जाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति सदस्यता शुल्क वसूली के आधार या बायलाज की प्रति की मांग करता है, तब उसे समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया जाता है। आरोप है कि ऐसे लोगों को सदस्यता देने से भी इनकार किया जाता है तथा सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।
बयान में यह भी कहा गया है कि समाज की नियमावली में प्रत्येक व्यक्ति के समाज का सदस्य बनने का उल्लेख है, लेकिन इसका हवाला देकर 50 रुपये सदस्यता शुल्क वसूली को उचित नहीं ठहराया जा सकता। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल में संशोधन के बाद सदस्यता शुल्क 10 रुपये निर्धारित किया गया था और उसी आधार पर समाज में सदस्यता अभियान तथा चुनाव भी संपन्न हुए थे।
वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि केंद्रीय समिति की स्वीकृति और अनुमोदन के बिना सदस्यता शुल्क को पुनः 50 रुपये करना उचित नहीं है। साथ ही महिलाओं के लिए सदस्यता शुल्क का कोई स्पष्ट उल्लेख बायलाज में नहीं होने के बावजूद उनसे भी शुल्क वसूले जाने पर आपत्ति जताई गई है।
समाज के कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि सदस्यता शुल्क को धन संग्रह का माध्यम बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि संगठन को आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता है तो नियमावली में संरक्षक और आजीवन सदस्यता के लिए निर्धारित प्रावधानों के तहत प्रयास किए जाने चाहिए।
वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि आय-व्यय का विवरण स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके अलावा पंजियक कार्यालय द्वारा वर्ष 2024 में अध्यक्ष और सचिव को जारी किए गए पत्रों का निर्धारित समय तक जवाब नहीं दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
बयान में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2022 में समाज के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा 16 बिंदुओं का आरोप पत्र केंद्रीय अध्यक्ष और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को सौंपा गया था, लेकिन उसका निराकरण आज तक नहीं किया गया। इसी कारण संबंधित सदस्यों ने अपनी आपत्तियों और मांगों को सार्वजनिक रूप से रखने का निर्णय लिया है।
हालांकि, इन आरोपों पर समाज के पदाधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसका पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।